सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार सख्त, 1046 अवैध संपत्तियों पर MCD का बड़ा एक्शन

Kittu Kumari11 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार सख्त, 1046 अवैध संपत्तियों पर MCD का बड़ा एक्शन

राजधानी दिल्ली में सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला पीजी (Paying Guest) इमारत गिरने से हुई सात लोगों की मौत के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे ने शहर में अवैध निर्माणों की पोल खोल दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी (MCD) ने एक बड़ा अभियान चलाया। 6 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कुल 1046 संपत्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, इस 34 दिनों के अभियान के दौरान एमसीडी ने 282 संपत्तियों को सील किया और 47 ऐसी इमारतों को जमींदोज कर दिया जिन्हें बेहद खतरनाक माना गया था। यह पूरी कार्रवाई दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 348 के तहत की गई है, जो अधिकारियों को खतरनाक ढांचों को गिराने या उनकी मरम्मत कराने का अधिकार देती है।

इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा कार्रवाई

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अगर जोनवार बात करें तो रोहिणी जोन में सबसे ज्यादा 158 संपत्तियों को निशाने पर लिया गया। इसके बाद दक्षिण जोन में 121 और शाहदरा नॉर्थ में 115 संपत्तियों पर कार्रवाई हुई। वहीं, जब बात इमारतों को ढहाने की आई, तो करोल बाग इलाके में सबसे ज्यादा 13 बिल्डिंग्स को गिराया गया।

बता दें कि केवल सत्य निकेतन ही नहीं, बल्कि सीमापुरी में भी एक इमारत गिरने से पांच लोगों की जान गई थी, जिसके बाद दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने आसपास के तीन घरों को सुरक्षा नोटिस जारी किए हैं।

सत्य निकेतन हादसे की जांच में जो खुलासे हुए वो चौंकाने वाले थे। पांच मंजिला इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था, उसमें अवैध बेसमेंट बनाया गया था और पांचवीं मंजिल भी गैरकानूनी थी। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि इमारत के पास फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) तक नहीं थी।

भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार अब 'पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड सेफ्टी बिल, 2026' लाने की तैयारी कर रही है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई है, जो पीजी ऑपरेटरों के लिए रजिस्ट्रेशन सिस्टम और छात्रों की शिकायतों के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार कर रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए आवासीय परिसरों के व्यावसायिक उपयोग और बिल्डिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर सख्त जवाबदेही तय करने को कहा है।

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