Master Plan-2047: दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण रोकने के लिए नई पार्किंग नीति का ऐलान

दिल्ली में ट्रैफिक जाम और अवैध पार्किंग की समस्या को कम करने के लिए Master Plan-2047 के तहत एक नई पार्किंग मैनेजमेंट नीति लाई गई है। इस नीति को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा तैयार किया गया है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य शहर में ट्रैफिक कंजेशन को दूर करना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। इस योजना में मेट्रो स्टेशनों के पास पार्किंग क्षमता कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने जैसे कई अहम कदम उठाए गए हैं।
मेट्रो स्टेशनों के पास घटाई जाएगी पार्किंग
नई नीति के नियमों के अनुसार मेट्रो स्टेशनों के पास की संपत्तियों में पार्किंग क्षमता में बड़ी कटौती की जाएगी। मेट्रो स्टेशन से 500 मीटर के दायरे में आने वाली संपत्तियों में पार्किंग स्पेस 30% तक कम कर दिया जाएगा। वहीं, 500 से 800 मीटर की दूरी पर स्थित संपत्तियों में पार्किंग क्षमता 15% तक घटाई जाएगी। इस रूपरेखा को केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने मिलकर तय किया है।
EV चार्जिंग और डायनेमिक पार्किंग फीस
नई सरकारी पार्किंग सुविधाओं में कम से कम 100 वाहनों की क्षमता होने पर 5% जगह इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशनों के लिए रिजर्व करनी होगी। इस प्लान में पे-एंड-पार्क मॉडल, डिमांड मैनेजमेंट रणनीतियों और साझा पार्किंग प्रणालियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हाई-डेंसिटी वाले इलाकों को मैनेज करने के लिए Master Plan-2047 में डायनेमिक पार्किंग प्राइसिंग का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें फीस पीक आवर्स और लोकेशन के हिसाब से बदलेगी।
प्रदूषण रोकने के लिए सर्दियों में डबल होगी फीस
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा घोषित 'प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क' के तहत प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक पूरे शहर में पार्किंग फीस दोगुनी कर दी जाएगी। इसके अलावा, अधिकारी नए वाहन रजिस्ट्रेशन को वेरिफाइड पार्किंग स्पेस की उपलब्धता से जोड़ने पर भी विचार कर रहे हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को निर्देश दिए गए हैं कि वह कम जगह वाले इलाकों में भी पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करे। इससे लास्ट-माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों का झुकाव प्राइवेट गाड़ियों के मुकाबले पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिलिंग और पैदल चलने की तरफ बढ़ेगा।