केंद्रीय सरकार ने दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाने के लिए दिल्ली मास्टर प्लान-2047 आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया

केंद्रीय सरकार ने 20 अगस्त 2026 को दिल्ली मास्टर प्लान-2047 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है, जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी गई थी। इस शहरी ब्लूप्रिंट का मुख्य उद्देश्य 2047 तक दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाना है, जो 3.2 करोड़ की अनुमानित आबादी को पूरा करेगा (Source)। केंद्रीय सरकार की इस योजना में बुनियादी ढांचे से लेकर पर्यावरण और आवास तक कई बड़े बदलाव शामिल किए गए हैं।
वेयरहाउस और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए नियम
इस योजना का एक मुख्य केंद्र बिंदु आवासीय क्षेत्रों, गांवों और पुराने बाजारों से अनियमित गोदामों को हटाना है ताकि ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और सुरक्षा खतरों को कम किया जा सके। नए दिशानिर्देशों के तहत, नियोजित गोदाम क्षेत्रों के लिए न्यूनतम प्लॉट का आकार 20,000 वर्ग मीटर होना चाहिए। विशिष्ट फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) प्रावधान स्थापित किए गए हैं; उदाहरण के लिए, 500 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए 12 मीटर सड़क की चौड़ाई और 140 एफएआर की आवश्यकता होती है। 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों के लिए वर्षा जल संचयन, जल भंडारण, अपशिष्ट प्रबंधन और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। इन सुविधाओं में केवल गैर-खतरनाक सामग्री की अनुमति है, और गैर-अनुपालन करने वाले व्यवसायों को एकीकृत फ्रेट हब या थोक बाजारों में स्थानांतरित किया जाएगा (Source)।
आवास योजना और शहरी विस्तार
यह योजना लगभग 4 करोड़ किफायती घरों के निर्माण की कल्पना करती है। भूमि पूलिंग का उपयोग करते हुए, डीडीए का लक्ष्य 200 वर्ग किलोमीटर में शहरी विस्तार को सुविधाजनक बनाना है, जिससे संभावित रूप से 12 मिलियन नए घर और 600 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क बन सके। मौजूदा विकसित क्षेत्रों में, उच्च एफएआर और कम ग्राउंड कवरेज आवश्यकताओं के माध्यम से पुनर्विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। सरकारी कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम सीमा 40,000 से घटाकर 3,000 वर्ग मीटर कर दी गई है। इसके अलावा, 'जहां झुग्गी वहां मकान' नीति का उद्देश्य पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से 1.7 मिलियन से अधिकु झुग्गीवासियों को स्थायी आवास प्रदान करना है (Source)।
बुनियादी ढांचा और पर्यावरण पहल
बुनियादी ढांचे में सुधार के तहत मेट्रो नेटवर्क को 416 किलोमीटर से बढ़ाकर 695 किलोमीटर करना और छह नए रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर जोड़ना शामिल है। शहर '24-घंटे के शहर' की अवधारणा को अपनाएगा, जिसमें चुनिंदा क्षेत्रों में 24/7 सार्वजनिक परिवहन की खोज की जाएगी। पर्यावरण पहलों में यमुना बाढ़ के मैदानों का पुनरुद्धार, 22 नालों का उपचार और 200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का विकास शामिल है। भवन निर्माण परमिट के लिए कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की अनिवार्य आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इस योजना के कार्यान्वयन की देखरेख करने वाले प्रमुख अधिकारियों में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हैं।