दिल्ली मास्टर प्लान के तहत राजधानी की कई ऐतिहासिक इमारतों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। 20 अगस्त 2026 को जारी किए गए Master Plan for Delhi-2047 (MPD-2047) में यह जानकारी दी गई है। इसे केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने लॉन्च किया है। इस दौरान दिल्ली के उपराज्यपाल तशरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहे। प्लान के अनुसार, अतिक्रमण, अनदेखी और गलत बदलावों के कारण ये इमारतें खतरे में हैं। अधिक जानकारी के लिए PIB और Ministry of Housing and Urban Affairs की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
एमपीड़ी-2047 के तहत लगभग 1,500 हेरिटेज प्रॉपर्टीज को बचाने का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके लिए 'कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान' बनाए जाएंगे। नीति के तहत इन पुरानी इमारतों को होटल, म्यूजियम, लाइब्रेरी या कल्चर सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा पहली बार 'हेरिटेज इंसेंटिव' के तहत 50 ट्रांसफरबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) पेश किए गए हैं। पुरानी दिल्ली को पर्यटन हब बनाने के लिए प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को वहां से हटाया जाएगा, जिससे जुड़ी जानकारी
Delhi Development Authority की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
मेहरौली, तुगलकाबाद और पुराना किला जैसे क्षेत्रों में 'हेरिटेज ट्रेल्स', 'कल्चरल वॉक' और 'वॉक-वे' बनाए जाएंगे ताकि लोग वहां आसानी से पहुंच सकें। 1 जुलाई 2026 को मंजूर हुई 'मुख्यमंत्री स्मारक गोद योजना' के तहत एनजीओ और निजी संस्थाओं को पीपीपी मॉडल पर स्मारकों के रखरखाव की अनुमति दी गई है। 'हेरिटेज रेजुवेनेशन स्कीम' के तहत विशेषज्ञ संस्थाओं को 2 करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। डीडीए ने चेतावनी दी है कि अवैध अतिक्रमण को बिना नोटिस के तुरंत गिराया जाएगा और इसका खर्च दोषियों से वसूला जाएगा।