दिल्ली मास्टर प्लान 2047: डीडीए ने रियल एस्टेट विकास के बीच शुरू की हिस्सेदारों के साथ बैठकें

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 यानी एमपीजी-2047 की आधिकारिक अधिसूचना 20 अगस्त 2026 को जारी होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में संपत्ति में निवेश के प्रति बाजार की रुचि काफी बढ़ गई है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे पूंजी लगाने से पहले सरकारी नियमों, भूमि पूलिंग नीतियों और बुनियादी ढांचा विकास की स्थिति की पूरी जांच-पड़ताल कर लें, जैसा कि PIB रिपोर्ट में बताया गया है। योजना को ठीक से लागू करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर हिस्सेदारों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डीडीए का लक्ष्य तीन महीने में लगभग 20 बैठकें करना है। 18 सितंबर 2026 को हुई बैठकों में वास्तुकारों, योजनाकारों और पेशेवरों ने ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), औद्योगिक ज़ोनिंग, विरासत संरक्षण और आपसी तालमेल जैसे मुख्य विषयों पर चर्चा की, जिसकी जानकारी डीडीए नोटिस में दी गई है।
एमपीजी-2047 के तहत लगभग 40 लाख नए किफायती घर बनाने का लक्ष्य है और मौजूदा इलाकों के पुनर्विकास से 700,000 और घर बनने की उम्मीद है। इस योजना में मेट्रो नेटवर्क को 695 किलोमीटर तक बढ़ाने, नए आरआरटीएस कॉरिडोर को जोड़ने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रैफिक प्रबंधन का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। भूमि पूलिंग के नियमों में 60:40 का मॉडल, कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन, 200 का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और 30 मीटर चौड़ी सड़क होना जरूरी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर Lal ने इस मास्टर प्लान को राजधानी के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस दस्तावेज को 'विकसित दिल्ली' का एक पूरा रोडमैप बताया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के 'सप्त-धारा' विजन से मेल खाती है, जो आधुनिकीकरण और विरासत को बचाकर रखने में संतुलन बनाती है, जैसा कि पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है।
इस योजना में अनधिकृत कॉलोनियों को 'जैसी है जहाँ है' के आधार पर कानूनी दर्जा देने और 50 साल से पुराने डीडीए रिहायशी फ्लैटों का पुनर्विकास करने का प्रस्ताव है। पर्यावरण के नियमों के तहत यमुना बाढ़ के मैदानों को O-1 और O-2 जोन में बांटा गया है और 150 वर्ग किलोमीटर के लो-डेंसिटी एरिया (एलडीए) के लिए एक नियम तय किया गया है। इस पूरी योजना को लागू करने वाली एजेंसियों में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA), एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली जल बोर्ड, डीएमआरसी, एनसीआरटीसी और आरडब्ल्यूए शामिल हैं।