केसों की पेंडेंसी पर सख्त हुए दिल्ली LG, अभियोजन निदेशालय को समय पर गवाह पेश करने के दिए निर्देश

दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने शहर की अदालतों में लंबित मामलों और सजा की कम दर को लेकर गहरी चिंता जताई है। एक समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना नहीं होना चाहिए। LG ने अभियोजन निदेशालय (Directorate of Prosecution) को निर्देश दिया है कि वे अदालती कार्यवाहियों में अनावश्यक तारीखों (adjournments) को कम करें और यह सुनिश्चित करें कि गवाह समय पर अदालत में पेश हों।
बैठक में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया कि 30 सितंबर तक दिल्ली की जिला अदालतों में कुल 3,02,477 ट्रायल केस लंबित थे। इनमें से 2,54,597 मामले मजिस्ट्रेट कोर्ट में और 47,880 मामले सेशन कोर्ट में लंबित हैं। LG ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत दिए गए प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए, जिसमें जांच और ट्रायल के लिए समय सीमा तय की गई है। उन्होंने डिजिटल केस ट्रैकिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
संसाधनों की कमी और भारी वर्कलोड की चुनौती
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि सरकारी वकीलों पर काम का बोझ बहुत ज्यादा है। सेशन कोर्ट में तैनात 155 पब्लिक प्रोसीक्यूटर्स के पास औसतन 309 केस लंबित हैं, जबकि रोहिणी कोर्ट में यह संख्या 627 तक पहुंच गई है। वहीं, मजिस्ट्रेट कोर्ट के सहायकों पर स्थिति और भी गंभीर है, जहां प्रति व्यक्ति औसत 2,021 केस हैं और रोहिणी में यह आंकड़ा 3,065 तक है।
संसाधनों की बात करें तो अभियोजन निदेशालय में स्वीकृत 507 पदों में से 216 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा सहायक स्टाफ के भी 42 पद रिक्त हैं। LG ने आश्वासन दिया कि वे पदों को भरने के लिए UPSC और बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए PWD के साथ समन्वय करेंगे।
LG ने यह भी निर्देश दिया कि चार्जशीट और सबूतों की बारीकी से जांच की जाए और दिल्ली पुलिस व फॉरेंसिक लैब के साथ बेहतर तालमेल बनाया जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाए और पीड़ितों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन मामलों में आरोपी बरी हुए हैं, उनका विश्लेषण किया जाए ताकि जांच और अभियोजन की खामियों को सुधार कर भविष्य में सजा की दर (conviction rate) बढ़ाई जा सके।