दिल्ली LG सरदार टी.एस. संधू ने PPP मॉडल में परिणामों पर जोर दिया

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के जरिए शहर के विकास को नई दिशा देने की बात कही है। द्वारका स्थित गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) में आयोजित एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि PPP प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य केवल फंड जुटाना नहीं, बल्कि ठोस परिणाम हासिल करना होना चाहिए।
एलजी ने इस बात पर चिंता जताई कि कई बार प्रोजेक्ट समय पर पूरे तो हो जाते हैं, लेकिन वे वास्तव में सफल नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा कि कोई प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन अगर वह आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है या आम जनता के लिए सस्ती सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो उसे सफल नहीं कहा जा सकता।
'विकसित दिल्ली 2047' के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी
उपराज्यपाल ने 'विकसित दिल्ली 2047' के विजन को पूरा करने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की रणनीतिक भागीदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने सफल PPP मॉडल के लिए चार मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया: सही प्रोजेक्ट का चयन, बेहतर तैयारी, संस्थागत समन्वय और मजबूत जवाबदेही।
उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि हर प्रोजेक्ट PPP मॉडल के लिए उपयुक्त नहीं होता। चयन करते समय सेवा की प्रकृति, सरकारी क्षमता, जोखिम और जनता को मिलने वाले लाभ का बारीकी से आकलन करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'गतिशक्ति' पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन उनके पूरे जीवनचक्र के आधार पर किया जाना चाहिए।
एलजी ने सुझाव दिया कि जोखिमों का बंटवारा उस पार्टी को किया जाए जो उसे संभालने में सबसे सक्षम हो। साथ ही, उन्होंने कानूनी जांच, व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility studies) और वास्तविक मांग के अनुमानों पर जोर दिया। उन्होंने एक 'PPP प्लेबुक' तैयार करने की वकालत की, जो प्रोजेक्ट चयन, कॉन्ट्रैक्टिंग और प्रदर्शन की निगरानी के लिए एक गाइड के रूप में काम करे।
अंत में, उन्होंने पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, समयबद्ध निर्णय लेने और विवाद समाधान तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए और प्रदर्शन संकेतकों के जरिए जवाबदेही तय की जा सके।