दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की बैठक में 12 अगस्त 2026 को Lieutenant Governor Taranjit Singh Sandhu की अध्यक्षता में Master Plan for Delhi-2047 (MPD-2047) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है (Source)। इस प्लान का उद्देश्य राजधानी का सतत और समावेशी शहरी विकास करना है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। यह स्वीकृत प्लान अब अंतिम मंजूरी और अधिसूचना के लिए केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।
बैठक के दौरान, पुराने DDA निर्मित दो मंजिला आवासीय यूनिट्स के पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के लिए एक महत्वपूर्ण यूनिफॉर्म पॉलिसी को भी मंजूरी दी गई। इनमें से कई यूनिट्स 50 साल से अधिक पुरानी हैं और संरचनात्मक रूप से कमजोर हैं, इसलिए
नई नीति उन्हें खाली आवासीय भूखंडों के समान पुनर्विकास अधिकार प्रदान करती है। यह पुनर्विकास लागू कनवर्जन चार्ज, बेटरमेंट लेवी, स्क्रूटनी फीस और यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लाॅज, फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR), ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई के नियमों और फायर सेफ्टी जरूरतों के पालन के अधीन होगा।
अन्य मंजूरियों में बिल्डिंग प्लान अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए Unified Building Bye-Laws (UBBL)-2016 में संशोधन शामिल है, जिसका उद्देश्य अनुपालन के बोझ को कम करना और Ease of Doing Business को बढ़ावा देना है। इन बदलावों से बिल्डिंग परमिट के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, मुख्य कारखाना निरीक्षक, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग जैसे विभिन्न निकायों से एनओसी की पूर्व आवश्यकता को हटा दिया जाएगा। इसके अलावा,
रिफाला-कुंडली कॉरिडोर के लिए मेट्रो डिपो विकसित करने हेतु नरेला सब-सिटी में 19.63 हेक्टेयर भूमि के लैंड यूज में बदलाव को मंजूरी दी गई, जिससे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार आसान होगा।
मास्टर Plan 2047 किफायती आवास की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर देता है, विशेष रूप से Transit-Oriented Development (TOD) पॉलिसी के तहत, जो मेट्रो और रेल कॉरिडोर के साथ 10 वर्षों में लगभग 17 लाख आवास यूनिट्स का अनुमान लगाती है। इस प्लान में नदी के बाढ़ के मैदान की रक्षा के लिए यमुना ओ-जोन में कंक्रीट संरचनाओं पर प्रतिबंध भी शामिल है। व्यापक रूप से,
इस विजन में Ease of Doing Business, Ease of Living और एक साफ-सुथरी राजधानी को बढ़ावा देना शामिल है, जिसमें बाजारों को देर तक खुला रखना, सुरक्षित नाइटलाइफ और शहरी पुनर्जीवन के माध्यम से स्लम-मुक्त शहर का लक्ष्य है।