दिल्ली में भगत सिंह की जयंती पर वाम दलों का मार्च, वोट के अधिकार की रक्षा का संकल्प

नई दिल्ली में शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती पर सोमवार को सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी और अन्य वाम नेताओं ने एकेजी भवन से गोल मार्केट स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा तक मार्च निकाला। इस दौरान नेताओं ने वोट के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा करने का संकल्प लिया और भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह विरोध मार्च चुनाव आयोग द्वारा की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूचियों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच निकाला गया। शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बंगा में हुआ था। वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे और उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहम भूमिका निभाई थी। 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकश्वर दत्त ने औपनिवेशिक कानूनों के विरोध में दिल्ली में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के अंदर बम फेंके थे और ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी थी। इसके बाद उन्हें लाहौर षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराया गया और 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की आयु में शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के साथ फांसी दे दी गई थी।
दिल्ली में वाम दलों का यह कार्यक्रम चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के साथ हुआ। सोमवार को कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान पर आपत्ति जताई। हैदराबाद में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ के नेतृत्व में इंदिरा गांधी की प्रतिमा से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला गया। कांग्रेस सांसद किरण कुमार चमला ने कहा कि उनकी पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और अभियोजन की मांग को लेकर शिकायत सौंपेगी। इस बीच, वाम दलों ने पटना में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने श्रीनगर तथा लखनऊ में प्रदर्शन किए।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और आरोप लगाया कि चुनाव जनादेश को चुराया जा रहा है। पवन खेड़ा ने कहा कि यह विरोध पूरे देश में जारी है, मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश को धोखा दिया है और चुनाव जनादेश चुराए जा रहे हैं, तथा एसआईआर पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी की आवश्यकता होती है और उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।