दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील 21 सितंबर को करेंगे हड़ताल, नए ट्रैफिक चालान नियमों का करेंगे विरोध

दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील 21 सितंबर 2026 को काम का बहिष्कार करेंगे और हड़ताल पर रहेंगे। यह फैसला नए ट्रैफिक चालान निस्तारण नियमों के विरोध में लिया गया है। यह निर्णय दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति द्वारा 20 सितंबर 2026 को जारी एक सर्कुलर में लिया गया था। यह हड़ताल केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के संशोधित नियम 167 के खिलाफ है, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 20 जनवरी 2026 के राजपत्र अधिसूचना में जारी किया गया था। समन्वय समिति ने इन नियमों को मनमाना और नागरिकों के निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन बताया है। नई दिल्ली बार एसोसिएशन के सचिव एडवोकेट तरुण राणा के अनुसार, सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स में सभी कामकाज पूरी तरह से ठप रहेंगे।
संशोधित नियमों पर वकीलों की मुख्य आपत्तियां
कानूनी पेशेवरों ने संशोधित नियम के कई प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। वे न्यायिक मजिस्ट्रेटों से सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDMs), कार्यकारी मजिस्ट्रेटों और अन्य विभागीय अधिकारियों को न्यायिक शक्तियां हस्तांतरित करने का विरोध कर रहे हैं। इन अधिकारियों में खाद्य और आपूर्ति विभाग तथा जिला परिवहन और प्रवर्तन कार्यालयों के अधिकारी शामिल हैं। वकीलों ने चालान खारिज होने के बाद आगे की न्यायिक राहत चाहने वाले वादकारियों के लिए 50 प्रतिशत अनिवार्य पूर्व-जमा (pre-deposit) की शर्त की भी आलोचना की है, जिसे उन्होंने एक अनुचित बाधा बताया है। इसके अलावा, नियम 167(5) के तहत, व्यक्तियों को 45 दिनों के भीतर एक निर्दिष्ट पोर्टल के माध्यम से निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा या चालान को चुनौती देनी होगी, ऐसा न करने पर नियम 167(6) के तहत चालान स्वीकार कर लिया जाता है।
सरकारी कदम और वकीलों की चेतावनी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की घोषणा के तहत दिल्ली सरकार ने इस संरचित, समयबद्ध और डिजिटल प्रणाली को लागू किया है। इसके अलावा, उपराज्यपाल ने शिकायत निवारण के लिए अधिकारियों को अधिसूचित किया है, लेकिन कानूनी बिरादरी अभी भी विरोध कर रही है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इन बदलावों का समर्थन करने के लिए अपनी ई-चालान मशीनों और कैमरा-आधारित प्रवर्तन प्रणालियों को अपग्रेड कर रही है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि इन कठोर और मनमाने नियमों से संबंधित उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।