दिल्ली के वकीलों ने नए ट्रैफिक चालान नियमों के खिलाफ किया उग्र प्रदर्शन

दिल्ली भर के वकीलों ने नए ट्रैफिक चालान नियमों के विरोध में हड़ताल और प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के संशोधित नियम 167 के तहत विवाद समाधान का अधिकार न्यायपालिका से छीनकर कार्यकारी अधिकारियों को दे दिया गया है। यह बदलाव 18 सितंबर 2026 से लागू हुए हैं। नए नियमों के अनुसार वाहन चालकों को अदालत जाने के बजाय पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जैसे विभागीय अधिकारियों के पास अपील करनी होगी।विवादों के निपटारे की यह शक्ति एसडीएम, तहसीलदार, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और आरटीओ जैसे कार्यकारी अधिकारियों को सौंपी गई है।
वकीलों द्वारा उठाई गई मुख्य चिंताओं में यह शामिल है कि प्रशासनिक फैसले की न्यायिक समीक्षा मांगने से पहले व्यक्ति को चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अग्रिम जमा करना होगा।नियम 167 के मुताबिक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 45 दिनों के भीतर चालान को चुनौती न देने पर जुर्माने की बात स्वीकार कर ली जाती है। वकीलों की समन्वय समिति के महासचिव नरवीर दहिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने केंद्रीय परामर्श के बिना ऐसा न करने के आश्वासन के बावजूद इन प्रशासनिक नियुक्तियों को आगे बढ़ाया।
दिल्ली जिला अदालत बार एसोसिएशन और नई दिल्ली बार एसोसिएशन सहित विभिन्न कानूनी संगठनों ने इस अधिसूचना को असंवैधानिक करार दिया है।उनका तर्क है कि यह नीति न्याय तक पहुंच को सीमित करती है और न्यायिक स्वतंत्रता से समझौता करती है। 21 सितंबर 2026 को साकेत, तीस हजारी, पटियाला हाउस, रोहिणी, द्वारका और कड़कड़ूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में वकीलों ने एक दिन की हड़ताल की।इसके बाद कानूनी समुदाय ने 24 सितंबर 2026 को न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूर रहने की घोषणा की है। साथ ही तीस हजारी कोर्ट से उपराज्यपाल के निवास तक एक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।