दिल्ली के लैंडफिल क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों पर स्वास्थ्य संकट, एनीमिया का बढ़ा खतरा
दिल्ली के लैंडफिल क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में एनीमिया और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा है। जानिए क्या कहती है नई स्टडी।

राजधानी दिल्ली की कचरा पहाड़ियों (लैंडफिल) के आसपास रहने वाले बच्चों के लिए खतरा अब और गहरा गया है। एक हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली के शहरी इलाकों में रहने वाली 10 से 19 साल की किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) की दर 67.2% तक पहुंच गई है। हालांकि पोषण की कमी और आयरन-फॉलिक एसिड (IFA) का कम सेवन इसके मुख्य कारण हैं, लेकिन अब प्रदूषण को भी इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से जोड़ा जा रहा है।
IIT दिल्ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए वैज्ञानिक शोध में यह पुष्टि हुई है कि हवा में मौजूद PM 2.5 प्रदूषक बच्चों के हीमोग्लोबिन स्तर को कम करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर इसका सबसे बुरा असर देखा जा रहा है।
लैंडफिल साइट्स बन रही हैं बीमारियों का केंद्र
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गाजीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे प्रमुख लैंडफिल साइट्स के पास रहने वाले बच्चे बेहद खतरनाक परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। यहाँ न केवल जहरीला लीचेट (कचरे से निकलने वाला गंदा पानी) और गंदगी है, बल्कि कचरे के ढेरों में लगने वाली आग से निकलने वाली मीथेन गैस भी स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इन कारणों से बच्चों में सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और शारीरिक विकास में रुकावट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
हैरानी की बात यह है कि जब भी दिल्ली में प्रदूषण की बात होती है, तो चर्चा केवल गाड़ियों के धुएं और पराली जलने तक सीमित रह जाती है, जबकि लैंडफिल साइट्स से होने वाले नुकसान को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
वर्तमान में दिल्ली नगर निगम (MCD) इन साइटों को ठीक करने के काम में जुटा है। अगस्त 2026 तक करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन पुराने कचरे को प्रोसेस कर 100 एकड़ से अधिक जमीन को वापस हासिल किया जा चुका है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से ओखला और भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक, और गाजीपुर साइट को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि कचरा प्रबंधन की यह चुनौती सबसे ज्यादा उन गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को प्रभावित कर रही है, जो इन डंपसाइट्स के करीब रहने को मजबूर हैं, जिससे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ रहा है।