दिल्ली में ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट की सफाई तेज, दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य

दिल्ली नगर निगम (MCD) मानसून की चुनौतियों के बीच ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइटों को साफ करने के काम में तेजी ला रहा है, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से सफाई करना है। हालांकि पिछले साल की रिपोर्ट बताती है कि मानसून की बारिश बायोमाइनिंग के काम को प्रभावित कर सकती है, लेकिन अधिकारी मौसमी चुनौतियों से निपटते हुए कचरा प्रसंस्करण और भूमि सुधार का काम आगे बढ़ा रहे हैं।
ओखला और भलस्वा साइटों पर प्रगति
दोनों साइटों पर महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। 9 जुलाई 2026 तक, ओखला के 62 एकड़ में से लगभग 30 एकड़ भूमि को बायोमाइनिंग और कचरा प्रसंस्करण के माध्यम से खाली करा लिया गया है, जिसमें 8 मिलियन मीट्रिक टन पुराना कचरा और 1.5 मिलियन मीट्रिक टन ताजा कचरा संसाधित किया गया। अगस्त 2026 की शुरुआत तक, ओखला में 2025 तक फेंका गया सारा पुराना कचरा साफ कर दिया गया है, और कचरा प्रसंस्करण क्षमता को जनवरी 2025 में 6,000 टन प्रति दिन से बढ़ाकर 30,000 टन प्रति दिन कर दिया गया है। भलस्वा में, 9 जुलाई 2026 तक 70 में से 25 एकड़ भूमि को सुधार लिया गया था, और केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर Lal ने बताया कि 31 जुलाई तक 9.9 मिलियन मीट्रिक टन पुराने कचरे का उपचार किया जा चुका है, तथा 15 अक्टूबर 2026 तक शेष पुराने कचरे को साफ करने का लक्ष्य है।
कचरा प्रबंधन और मानसून की चुनौतियां
जुलाई 2022 और जुलाई 2026 के बीच, एमसीडी ने गाजीपुर सहित दिल्ली के तीन प्रमुख डंप साइटों पर लगभग 21.26 मिलियन मीट्रिक टन पुराने कचरे की बायोमाइनिंग की। इस प्रगति के बावजूद, अधिकारियों को लगातार ताजा कचरा फेंके जाने और मानसून के दौरान गाद निकालने के अभियान से उत्पन्न होने वाली गाद जैसी लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लैंडफिल पर बोझ बढ़ जाता है। प्रयास वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों पर केंद्रित हैं, जिसमें 40 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने के लिए ओखला वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का प्रस्तावित विस्तार भी शामिल है, जिसका उद्देश्य दिल्ली को लैंडफिल-मुक्त बनाना है।