दिल्ली सरकार का बड़ा कदम: प्रॉपर्टी विवादों के लिए बनेंगे स्पेशल कोर्ट, लैंड रिकॉर्ड्स होंगे डिजिटल

Kittu Kumari19 October 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली सरकार का बड़ा कदम: प्रॉपर्टी विवादों के लिए बनेंगे स्पेशल कोर्ट, लैंड रिकॉर्ड्स होंगे डिजिटल

दिल्ली में जमीन-जायदाद से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। दिल्ली सरकार जल्द ही 'दिल्ली लैंड रिकॉर्ड्स बिल, 2026' लाने की तैयारी में है, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे लैंड रिकॉर्ड सिस्टम का आधुनिकीकरण करना है। इस नई पहल के तहत न केवल कागजी कार्रवाई को डिजिटल किया जाएगा, बल्कि प्रॉपर्टी से जुड़े कानूनी झगड़ों को तेजी से सुलझाने के लिए हर जिले में स्पेशल कोर्ट (विशेष अदालतें) भी स्थापित की जाएंगी।

हर प्रॉपर्टी को मिलेगा अपना 'आधार कार्ड'

इस पूरी योजना का सबसे दिलचस्प हिस्सा 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' है। अब दिल्ली की हर रेजिडेंशियल, कमर्शियल और एग्रीकल्चरल प्रॉपर्टी को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे 'यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफायर' (UPID) कहा जाएगा, जिसमें क्यूआर-कोड के जरिए जमीन की बाउंड्री का पूरा डेटा मौजूद होगा। यह सिस्टम ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे देशभर में 14 अंकों का 'भू-आधार' या ULPIN फ्रेमवर्क लागू किया जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट को पुख्ता बनाने के लिए दिल्ली सरकार केंद्र सरकार के 'डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम' (DILRMP 3.0) के साथ तालमेल बिठा रही है, जिसके लिए 2026 से 2031 तक 565.5 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इससे पहले केंद्र की 'स्वामित्व' योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में ड्रोन सर्वे कर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे इस नए सिस्टम की राह आसान हुई है।

रिकॉर्ड्स की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, सर्वे ऑफ इंडिया और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ मिलकर काम करेगी। इसके अलावा, सरकार अपनी खुद की संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए DAMIS डेटाबेस का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें करीब 14,000 सरकारी संपत्तियों का ब्यौरा है, ताकि दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का सही से पालन हो सके।

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel
Share:

Comments

Leave a comment