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Delhi Land Records Bill 2026: दिल्ली में जल्द मिलेंगे 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड', खत्म होंगे जमीन विवाद!

Kittu Kumari30 July 20262 min read40 views
Delhi Land Records Bill 2026: दिल्ली में जल्द मिलेंगे 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड', खत्म होंगे जमीन विवाद!

दिल्ली में प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार जल्द ही 'Delhi Land Records Bill, 2026' लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत राजधानी की सभी संपत्तियों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत दिल्ली के सभी रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यूनिक 'Property Aadhaar Cards' जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी है कि इस बिल को जल्द ही कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में इसे पास कराया जाएगा।

ड्रोन सर्वे और QR कोड वाली स्मार्ट डिजिटल आईडी

शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में एरियल और ड्रोन टेक्नोलॉजी के जरिए वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा, जिसके बाद हर प्रॉपर्टी को एक यूनिक 'Property Aadhaar Card' मिलेगा। नागरिकों के आधार कार्ड की तरह ही UIDAI के मानकों पर आधारित ये स्मार्ट कार्ड QR कोड के साथ आएंगे जो एक सुरक्षित डिजिटल पहचान का काम करेंगे। QR कोड स्कैन करते ही प्रॉपर्टी का पूरा डिजिटल फॉर्म-13 सामने आ जाएगा, जिसमें उसका नक्शा, सीमाएं, पड़ोसी प्रॉपर्टी आईडी, खसरा नंबर, सह-occupants और Delhi Abadi Deh Survey and Record Management Rules, 2025 के तहत जारी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जानकारी मिलेगी। सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से देने के लिए इन डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स को 'Family Card initiative' से भी जोड़ा जाएगा

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और विवादों से राहत

केंद्र की स्वामित्व योजना (SVAMITVA scheme) के तहत 30 ग्रामीण गांवों में स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड बनाने के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। 21-22 जुलाई 2026 तक 48 गांवों में 12,232 प्रॉपर्टी का सर्वे पूरा हो चुका है, जिनमें से 8,423 प्रॉपर्टी यानी लगभग 69% को विवाद-मुक्त पाया गया है और वे स्मार्ट कार्ड जारी करने के लिए तैयार हैं। यह नया सिस्टम दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ जुड़ेगा। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप uniindia.com की रिपोर्ट देख सकते हैं। यह सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाएगा और ऑथेंटिक डिजिटल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स देकर जमीन से जुड़े विवादों को काफी हद तक कम करेगा।

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