दिल्ली के जज ने 10 साल की दुष्कर्म पीड़िता को लिखा भावुक पत्र, सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

दिल्ली में एक ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंग ने 10 साल की दुष्कर्म पीड़िता को एक भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देने और पीड़िता के साहस को हमेशा याद रखने की बात कही है। जज ने लिखा कि भले ही उसका बचपन वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसकी बहादुरी को याद रखा जाएगा। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लिया, अदालत ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन की सार्वजनिक सुरक्षा में पूर्ण विफलता की आलोचना की, मीडिया के लिए यौन अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल हैं, उन्होंने इन घटनाओं को 2012 के निर्भया मामले के समान बताया। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि वे सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। अदालत ने कहा कि खराब रोशनी, अपर्याप्त निगरानी और प्रशासनिक कमियों के कारण पार्क, बसें और मेट्रो स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान उच्च जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बनने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि केवल सहानुभूति व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने मीडिया संगठनों, पत्रकारों और प्रकाशन मंचों को निर्देश दिया कि वे यौन अपराधों की रिपोर्टिंग जिम्मेदारी से, संवेदनशीलता के साथ और संयम से करें ताकि पीड़ितों और उनके परिवारों को और अधिक मानसिक आघात न पहुंचे।
एक अन्य संबंधित घटना में, 25 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक सत्र न्यायाधीश द्वारा 7 साल की दुष्कर्म पीड़िता को भेजे गए भावनात्मक संदेश की सराहना की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि बेटी, अपना जीवन जियो, तुम्हारे साहस को हमेशा याद रखा जाएगा। उच्च न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि इस संदेश को प्रिंट करके पीड़िता के परिवार को सौंपा जाए, साथ ही 10.5 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए। इस मामले की आधिकारिक जानकारी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से ली गई है।