दिल्ली के सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर में जेजे क्लस्टर का होगा कायाकल्प, DUSIB ने शुरू की प्रक्रिया

Kittu Kumari17 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली के सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर में जेजे क्लस्टर का होगा कायाकल्प, DUSIB ने शुरू की प्रक्रिया

दिल्ली के झुग्गी-झोपड़ी (जेजे) क्लस्टर्स में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर जैसे इलाकों में जेजे क्लस्टर्स के पुनर्विकास की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि लोगों को बेहतर और स्थायी आवास मिल सके।

प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए एक ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह एडवाइजर न केवल प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता (feasibility) की जांच करेगा, बल्कि जरूरी रेगुलेटरी क्लियरेंस दिलाने और निजी डेवलपर्स के चयन में भी मदद करेगा। इस पूरी योजना का आधार जून 2026 में स्वीकृत 'दिल्ली स्लम और जेजे क्लस्टर रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी 2026' है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अंतिम रूप दिया गया था।

पात्रता सीमा बढ़ी और सुविधाओं का विस्तार

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इस नई नीति की सबसे बड़ी राहत यह है कि पुनर्वास के लिए पात्रता की समय सीमा (cut-off date) को 1 जनवरी 2015 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब अधिक संख्या में लोग इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल घर देना नहीं, बल्कि निवासियों को स्कूल, खेल के मैदान, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी जैसे बुनियादी सामाजिक बुनियादी ढांचे से जोड़ना है।

मास्टर प्लान दिल्ली (MPD) 2047 के तहत, 3,000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर पुनर्विकास की अनुमति है, बशर्ते कि कम से कम 75% निवासी और घर मालिक अपनी लिखित सहमति दें। योजना के मुताबिक, निजी डेवलपर्स बहुमंजिला आवासीय इकाइयां बनाएंगे। लागत की भरपाई के लिए जमीन के एक हिस्से पर व्यावसायिक विकास (commercial development) की भी अनुमति होगी।

शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह कदम 'विकसित भारत' के विजन के अनुरूप है, जो समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देता है। सरकार की योजना अब काफी तेज है; 45 दिनों के भीतर पांच क्लस्टर्स के टेंडर निकालने के निर्देश दिए गए हैं और आगे हर महीने कम से कम पांच ऐसे PPP आधारित पुनर्वास प्रोजेक्ट्स के टेंडर जारी करने की तैयारी है।

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