छठ पूजा से पहले यमुना की सफाई: जहरीले झाग को हटाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड का थ्री-फेज प्लान
दिल्ली जल बोर्ड ने छठ पूजा से पहले यमुना के जहरीले झाग को हटाने के लिए तीन चरणों वाला केमिकल स्प्रे प्लान शुरू किया है।

छठ महापर्व के करीब आते ही दिल्ली की यमुना नदी में तैरता सफेद जहरीला झाग श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। इस समस्या से निपटने और भक्तों को स्वच्छ वातावरण देने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने एक खास रणनीति तैयार की है। यमुना झाग सफाई अभियान के तहत अब तीन चरणों में केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि नदी की सतह पर जमा इस गंदे झाग को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
खास तौर पर कालिंदी कुंज और ओखला बैराज जैसे इलाकों में इस अभियान पर जोर दिया जा रहा है। जल बोर्ड ने नावों की मदद से मैन्युअल तरीके से झाग हटाने के साथ-साथ एंटी-फोमिंग एजेंट (झाग रोकने वाले रसायन) का छिड़काव शुरू कर दिया है। दरअसल, नदी में ताजे पानी का प्रवाह कम होने और नालों से आने वाले बिना उपचारित सीवेज के कारण यह सफेद झाग लगातार बन रहा है।
हाईटेक प्रोजेक्ट और बुनियादी ढांचे पर जोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मास्टर प्लान का ऐलान किया है, जिसमें 10 पावर बोट्स का इस्तेमाल और पानी के बहाव को बढ़ाने जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, ओखला बैराज पर 24 लाख रुपये की लागत से एक हाईटेक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके तहत फोम अरेस्टर्स और स्प्रिंकलर लगाए जा रहे हैं।
वहीं, केंद्र सरकार भी इस दिशा में बड़े कदम उठा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाले 43 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य सीवेज नेटवर्क को सुधारना है ताकि गंदा पानी यमुना में मिलने से रोका जा सके और लोगों को 24 घंटे साफ पीने का पानी मिल सके।
हालांकि, चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के मुताबिक, आईटीओ ब्रिज के पास बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर 20 mg/L तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित सीमा (3 mg/L) से कहीं ज्यादा है। इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता भी 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है, जिससे प्रशासन के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है।