दिल्ली की जेलों के लिए 27.5 करोड़ रुपये के डिजिटल आधुनिकीकरण को मंजूरी

दिल्ली सरकार ने जेल प्रणाली के लिए 25 सितंबर 2026 को 27.5 करोड़ रुपये के डिजिटल आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पुराने नेटवर्क बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करना और वीडियो-कांफ्रेंसिंग क्षमताओं का विस्तार करना है। यह प्रोजेक्ट बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच महीने के भीतर पूरा किया जाना तय है।
पुराने नेटवर्क सिस्टम को बदला जाएगा
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत 2004-2005 से चले आ रहे पुराने नेटवर्क सिस्टम और 2010-2011 के नेटवर्क स्विच को पूरी तरह बदला जाएगा। ये सिस्टम पुराने हो चुके हैं और इन्हें बदलने की जरूरत है। वर्तमान बुनियादी ढांचे का एक व्यापक सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।
तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलें शामिल
यह प्रोजेक्ट तिहाड़, रोहिणी और मंडोली परिसरों में स्थित 16 जेलों को कवर करता है। इसका मुख्य उद्देश्य अदालत की सुनवाई के लिए 840 समर्पित वीडियो-कांफ्रेंसिंग पॉइंट का समर्थन करने वाला हाई-स्पीड लोकल एरिया नेटवर्क स्थापित करना है। वर्तमान में जेलों में कैदियों की संख्या लगभग 19,500 है, जो स्वीकृत क्षमता 10,026 से काफी अधिक है। वर्चुअल पेशी से उच्च जोखिम वाले कैदियों को अदालत ले जाने में आने वाली सुरक्षा चुनौतियों को कम करने में मदद मिलेगी।
ई-कोर्ट और ई-मुलाकात सेवाओं को बढ़ावा
न्यायिक कार्यवाही के अलावा, यह बुनियादी ढांचा नए आपराधिक कानूनों को लागू करने और ई-कोर्ट सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा, इससे ई-मुलाकात पहल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कैदियों और उनके परिवारों के बीच ऑनलाइन बातचीत अधिक विश्वसनीय हो सकेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 840 क्यूबिकल्स की विस्तारित क्षमता यह सुनिश्चित करेगी कि वर्चुअल सुनवाई केवल हाई-प्रोफाइल कैदियों और गैंगस्टर्स के लिए ही नहीं, बल्कि आम कैदियों के लिए भी उपलब्ध हो। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।