BS-VI नियमों का असर: दिल्ली के बस टर्मिनलों पर घटीं अंतरराज्यीय बसें
दिल्ली में BS-VI उत्सर्जन मानकों के कारण अंतरराज्यीय बसों की संख्या कम हुई है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए सख्त नियमों का असर अब यात्रियों की यात्रा पर दिखने लगा है। दिल्ली के अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) पर बसों की आवाजाही में भारी कमी आई है। दरअसल, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत उन डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
इस पाबंदी का असर सबसे ज्यादा सराय काले खां और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख टर्मिनलों पर देखा जा रहा है। सराय काले खां ISBT के अधिकारियों के मुताबिक, यहां बसों की संख्या में लगभग 15 से 20 की गिरावट दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा परेशानी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जाने वाले रूटों पर हो रही है। उत्तराखंड राज्य सड़क परिवहन विभाग ने बताया कि कश्मीरी गेट ISBT से चलने वाली बसों की यात्राओं में 25 प्रतिशत की कमी आई है। यहाँ तक कि हल्द्वानी से चलने वाली लोकप्रिय 'जनरथ' एसी बस सेवा को फिलहाल निलंबित करना पड़ा है।
नियमों की सख्ती और निगरानी
हैरानी की बात यह है कि जहां उत्तराखंड की सेवाएं प्रभावित हैं, वहीं उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन की बसों पर इस नियम का कोई असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह यह है कि उत्तर प्रदेश के बेड़े में शामिल सभी बसें पहले से ही BS-VI मानकों के अनुरूप हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, अब केवल BS-VI डीजल वाहन, सीएनजी बसें और इलेक्ट्रिक वाहन ही राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश कर सकते हैं। इसके साथ ही, सभी वाहनों के पास एक वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) होना अनिवार्य है।
प्रशासन इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। बॉर्डर चेकपोस्टों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए वाहनों की निगरानी की जा रही है। साथ ही फिजिकल चेकिंग भी जारी है। जो कमर्शियल वाहन इन मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, उन्हें शहर की सीमा पर ही वापस लौटाया जा रहा है। यह प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा।