दिल्ली औद्योगिक नीति 2026 मंजूर: हाई-टेक हब बनेगा शहर, युवाओं को मिलेंगे रोजगार

राजधानी दिल्ली अब सिर्फ राजनीति और प्रशासन का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक हाई-टेक औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली कैबिनेट ने 'दिल्ली औद्योगिक नीति 2026' को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह 10 साल का एक ऐसा रणनीतिक रोडमैप है, जिसका मकसद दिल्ली को नॉलेज-बेस्ड और टेक्नोलॉजी-ड्रिवेन इंडस्ट्रीज के जरिए एक आधुनिक बिजनेस सेंटर में बदलना है।
इस नई नीति के तहत सरकार का पूरा जोर ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने पर है जो प्रदूषण मुक्त हों और जिनमें वैल्यू ज्यादा हो। इसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), डेटा सेंटर्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), हेल्थकेयर, अर्बन लॉजिस्टिक्स और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के पास पहले से ही बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव संसाधन है, जिसका इस्तेमाल कर शहर को इको-फ्रेंडली बिजनेस सेंटर बनाया जाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
निवेशकों के लिए करोड़ों की सब्सिडी और विशेष प्रोत्साहन
सरकार ने इस नीति को जमीन पर उतारने के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन का ऐलान किया है। अलग-अलग सेक्टर के लिए सब्सिडी की सीमा तय की गई है:
- IT/ITES यूनिट्स: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 10 करोड़ रुपये तक और किराए में सहायता के लिए 2 करोड़ रुपये तक की मदद मिलेगी।
- ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 करोड़ रुपये तक की सहायता और R&D के लिए अतिरिक्त ग्रांट दी जाएगी।
- डेटा सेंटर: ऑपरेटर पूंजी निवेश सब्सिडी के तौर पर 10 करोड़ रुपये तक पा सकते हैं।
- हेल्थकेयर: 1,000 या उससे अधिक बेड वाले अस्पतालों के लिए 100 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच 'मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना' के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके साथ ही रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 50% ग्रांट (अधिकतम 50 लाख रुपये) और प्रति पेटेंट 5 लाख रुपये (अधिकतम 4 पेटेंट तक) की सहायता दी जाएगी। MSME के आधुनिकीकरण के लिए 5 से 7 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद का प्रावधान है, जबकि महिला उद्यमियों के लिए सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में प्रोत्साहन की सीमा को और बढ़ाया गया है।
व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान (Ease of Doing Business) बनाने के लिए सरकार ने 'इन्वेस्ट दिल्ली' नाम की एक समर्पित एजेंसी बनाई है। यह एजेंसी निवेशकों के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट होगी, जो साइट सिलेक्शन से लेकर मंजूरी और शिकायतों के निपटारे तक का काम संभालेगी। साथ ही, 'दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल' के जरिए मंजूरी की पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाएगा।