दिल्ली के 9 गांवों में औद्योगिक विकास की तैयारी, बनेंगे वेयरहाउस और फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स

राजधानी दिल्ली में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) के माध्यम से अब शहर के नौ गांवों में फैली करीब 13.26 एकड़ ग्राम सभा की जमीन पर वेयरहाउस और फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को एक व्यवस्थित रूप देना और जमीन का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
इन इलाकों में होगा विकास और सर्वे का काम
इस पूरी परियोजना को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बदुसराय, गलीपुर, झटीकरा, राघोपुर, रावता और धंसा गांवों में कुल 9.24 एकड़ जमीन का उपयोग किया जाएगा। वहीं, बाहरी उत्तरी दिल्ली के औचंडी, निजामपुर रसूलपुर और ताजपुर कलान में 4.02 एकड़ जमीन पर विकास कार्य होंगे।
परियोजना की शुरुआत के लिए DSIIDC ने एक टेंडर जारी किया है, जिसके तहत इन जमीनों का विस्तृत टोपोग्राफिकल सर्वे किया जाएगा। इस सर्वे के लिए करीब 2.25 लाख रुपये का अनुमान लगाया गया है। चयनित एजेंसी का काम प्लॉट की सीमाओं, मौजूदा ढांचों और भौगोलिक विशेषताओं का सटीक नक्शा तैयार करना होगा। यह सर्वे उद्योग विभाग से DSIIDC को जमीन के हस्तांतरण और भविष्य की सटीक प्लानिंग के लिए बेहद जरूरी है।
सरकार ने इस दिशा में तेजी दिखाते हुए जिला प्रशासन को 50 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। हालांकि, इस विकास कार्य की रफ्तार स्थानीय किसानों की सहमति पर निर्भर करेगी। नियमों के मुताबिक, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 70% स्थानीय किसानों की मंजूरी अनिवार्य है।
खास बात यह है कि यहाँ 'फ्लैटेड फैक्ट्रियों' का कॉन्सेप्ट लाया जा रहा है। इसका मतलब है कि एक ही बहुमंजिला इमारत के भीतर कई छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयों को जगह दी जाएगी, जिससे कम जमीन में ज्यादा उद्योगों को बसाया जा सके और शहर के बाहरी इलाकों में औद्योगिक विस्तार को गति मिले।