दिल्ली के हॉस्टल में बड़ा हादसा, पांच मंजिला इमारत ढहने से सात की मौत और कई कार्रवाई शुरू

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक पांच मंजिला 'हॉस्टल डेज़' पेइंग गेस्ट (पीजी) इमारत ढह गई। इस हादसे में पांच दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों सहित सात लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। यह 50 साल पुरानी इमारत थी जिसे मालिकों द्वारा अधिक आवास मांग को पूरा करने के लिए संशोधित किया गया था। इस मामले में 81 वर्षीय मालिक हरिराम गुप्ता को लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में सामने आया कि इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था, इसमें एक अनधिकृत बेसमेंट था और एक अवैध पांचवीं मंजिल थी जिसे नींव सहन नहीं कर सकती थी। इसके अलावा इमारत बिना अग्निशामक एनओसी के चल रही थी। हादसे के बाद नगर निगम (एमसीडी) ने अपने उपायुक्त सहित आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। 9 सितंबर 2026 तक चले प्रवर्तन अभियान में एमसीडी ने लगभग 1,100 पीजी संपत्तियों का सर्वेक्षण किया है, जिसके तहत 24 संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया और सात को सील कर दिया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एमसीडी को एक सप्ताह के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी हॉस्टलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है और मालिकों, नागरिक अधिकारियों तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की जवाबदेही पर सवाल उठाया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट छात्र आवास के सुरक्षा ऑडिट के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे पर विचार कर रहा है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अजित कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय परिसरों के पास तत्काल निरीक्षण का आग्रह किया है। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में 18 सदस्यीय समिति को मंजूरी दे दी है जो छात्र आवास की कमी और सुरक्षा पर 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी। यह समिति एक केंद्रीकृत डेटाबेस और डिजिटल निगरानी तंत्र के विकास की देखरेख करेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी पीजी आवासों के लिए अनिवार्य लाइसेंस, पुलिस सत्यापन और किराया दरों के कड़े पालन की नीति शुरू की है।
यह घटना विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे में भारी कमी को उजागर करती है; दिल्ली विश्वविद्यालय वर्तमान में अपने 2.5 लाख से अधिक नियमित छात्रों की आबादी के लिए केवल 9,000 हॉस्टल बेड प्रदान करता है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कॉलेज के हॉस्टल की सुविधाओं को बढ़ाने की मांग को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। छात्र निजी पीजी में टूटी दीवारों, पानी के रिसाव और अपर्याप्त सुरक्षा बुनियादी ढांचे जैसे व्यापक मुद्दों पर लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।