दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेघर लोगों को अपने वोटिंग अधिकार बचाने में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में 47.5 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जिसके बाद निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नाम दोबारा जोड़ने के प्रयास शुरू किए हैं। 22 सितंबर 2026 तक केवल 3,12,000 फॉर्म 6 आवेदन ही प्रोसेस हो पाए हैं, जिसका कारण इस आबादी का अत्यधिक घूमना-फिरना बताया गया है।
कमजोर वर्गों पर पड़े इस असर को दूर करने के लिए अधिकारियों ने 23 और 24 सितंबर 2026 को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के रैन बसेरों में विशेष नामांकन शिविर लगाए। सराय काले खां रैन बसेरे में ऐसे ही एक शिविर में पांच बूथ लेवल अधिकारियों ने मीना देवी जैसी 40 वर्षीय सफाई कर्मचारी की मदद की। काम में व्यस्तता के कारण नोटिस की सुनवाई छूटने वाली मीना देवी ने बताया कि नागरिकता को लेकर उत्पीड़न के डर से उनके लिए वोटर आईडी बहुत जरूरी है।
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 सितंबर 2026 को यह फैसला दिया था कि मौजूदा तंत्र बेघर मतदाताओं की पर्याप्त रक्षा करता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारियों को रात में निवास की पुष्टि के लिए भौतिक सत्यापन करना होता है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार (Source:
Election Commission of India FAQ), यदि रात के दौरों से निवास की पुष्टि हो जाती है तो बेघर व्यक्तियों को दस्तावेज प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं होती है। 30 सितंबर 2026 की दावे और आपत्तियों की समय सीमा से पहले 27 सितंबर 2026 को सभी मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पंजीकरण शिविर तय किए गए हैं। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।