दिल्ली हाई कोर्ट: X के फर्जी नोटिस मामला, कोर्ट ने IFF और SFLC की याचिकाएं निपटाईं

दिल्ली हाई कोर्ट ने IFF और SFLC की याचिकाओं का निपटारा किया, X ने माना कि दिल्ली पुलिस के नाम पर फर्जी नोटिस भेजे गए थे।

Kittu Kumari6 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाई कोर्ट: X के फर्जी नोटिस मामला, कोर्ट ने IFF और SFLC की याचिकाएं निपटाईं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फर्जी टेकडाउन नोटिस भेजने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (SFLC) द्वारा दायर याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब X ने अदालत के सामने यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ताओं को भेजे गए नोटिस दिल्ली पुलिस द्वारा नहीं, बल्कि एक 'बहरूपिये' (impostor) द्वारा भेजे गए थे।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब IFF और SFLC को कुछ ऐसे नोटिस मिले, जिनमें उनके अकाउंट्स और विशिष्ट पोस्ट को हटाने की मांग की गई थी। इसमें @geoblockedindia अकाउंट को पूरी तरह हटाने की बात कही गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने इन नोटिसों को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है। एक फर्जी नोटिस में तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का हवाला दिया गया था, जो आरएसएस (RSS) से जुड़ी सामग्री से संबंधित था।

X की आंतरिक जांच में खुला फर्जीवाड़े का सच

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि इन नोटिसों में कई गंभीर खामियां थीं। नोटिस में दिए गए ईमेल एड्रेस मौजूद ही नहीं थे और संपर्क विवरण दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट से मेल नहीं खा रहे थे। साथ ही, इन नोटिसों के साथ कोई वैध अदालती आदेश भी संलग्न नहीं था।

अदालत की पूछताछ के बाद X ने अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट पेश की और पुष्टि की कि ये नोटिस फर्जी थे। X ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इन अवैध अनुरोधों के आधार पर IFF और SFLC के अकाउंट्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म ने इस धोखाधड़ी और impersonation के जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।

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