विनेश फोगाट केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को 2 हफ्ते में नोटिस सुलझाने का दिया आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को विनेश फोगाट के खिलाफ जारी शो-कॉज नोटिस पर 2 हफ्ते में फैसला लेने का आदेश दिया है।

दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट के लिए राहत की खबर आई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह विनेश फोगाट को जारी किए गए दो शो-कॉज नोटिसों पर अगले दो हफ्तों के भीतर अंतिम फैसला ले। जस्टिस अमित महाजन की अदालत ने यह आदेश 29 अक्टूबर 2026 को जारी किया, ताकि खिलाड़ी के करियर और मानसिक स्थिति पर पड़ रहे अनिश्चितता के प्रभाव को खत्म किया जा सके।
अदालत में सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने दलील दी कि अनुशासनिक कार्रवाई की यह अनिश्चितता विनेश की तैयारियों में बाधा बन रही है। उन्होंने बताया कि दिसंबर के मध्य में एक राष्ट्रीय टूर्नामेंट होने वाला है और ऐसे में यह मामला विनेश की एकाग्रता और तैयारी को प्रभावित कर रहा है। जस्टिस महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी खिलाड़ी को लंबे समय तक इस तरह की अनिश्चितता में रखना उसके मानसिक स्वास्थ्य और खेल के प्रदर्शन के लिए हानिकारक हो सकता है।
क्या है पूरा विवाद और नोटिस की वजह?
WFI ने विनेश फोगाट को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए थे। पहला नोटिस 9 मई 2026 को भेजा गया था, जिसमें अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इसमें विशेष रूप से यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के उस नियम का जिक्र था, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद वापसी करने वाले एथलीटों को छह महीने का अनिवार्य नोटिस देना होता है। वहीं, दूसरा नोटिस 17 जून 2026 को जारी किया गया, जो 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के दौरान हुई कथित घटनाओं से जुड़ा था।
गौरतलब है कि इससे पहले मई 2026 में भी हाई कोर्ट ने WFI के इस फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसमें विनेश को घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। उस समय कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक विशेषज्ञ पैनल बनाने का निर्देश दिया था। साथ ही, अदालत ने WFI के उस रवैये पर भी नाराजगी जताई थी, जिसमें विनेश की पेरिस ओलंपिक में अयोग्य घोषित होने की घटना को "राष्ट्रीय शर्म" बताया गया था।
अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि WFI को दो हफ्ते में अपना निर्णय लेना होगा। हालांकि, अदालत ने यह भी जोड़ा कि यदि WFI इस समय सीमा के बाद कोई फैसला लेता है, तो वह 20 जनवरी 2027 को होने वाली अगली सुनवाई तक स्थगित (abeyance) रहेगा।