Delhi High Court का बड़ा फैसला: महिला के कपड़ों पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं, आरोपी दोषी करार

Delhi High Court ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि किसी भी महिला को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का पूरा अधिकार है और कोई भी व्यक्ति या संस्था उसके कपड़ों को लेकर आदेश नहीं दे सकती। Justice Chandrasekharan Sudha की एकल पीठ (single-judge Bench) ने साल 2013 के एक sexual harassment मामले में आरोपी Sajid Ali को बरी करने के 2014 के फैसले को पलट दिया और उसे Indian Penal Code (IPC) की धारा 354A(1)(i) के तहत दोषी ठहराया।
इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- Delhi High Court ने महिला के कपड़ों के चुनाव के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित बताया।
- अदालत ने 2013 के sexual harassment मामले में आरोपी Sajid Ali को दोषी करार दिया।
- कोर्ट ने साफ कहा कि महिला के कपड़े कभी भी उत्पीड़न का कारण या बचाव का आधार नहीं हो सकते।
- निचली अदालतों के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि सुनवाई के दौरान महिला के कपड़ों, चरित्र या व्यक्तिगत जीवन पर बेवजह सवाल न पूछे जाएं।
अदालत की सख्त टिप्पणी और बचाव पक्ष को फटकार
अदालत ने बचाव पक्ष की उन दलीलों को कड़ी फटकार लगाई जिनमें महिला के कपड़ों, जैसे कि जींस पहनने, को sexual harassment से जोड़ा गया था। Justice Sudha ने जोर देकर कहा कि "लड़की या महिला क्या पहनना चाहती है, यह उसका अपना निजी फैसला है। न तो पड़ोसियों, न समाज, न आरोपी और न ही अदालत में पेश होने वाले वकील को उसके कपड़ों पर निर्देश देने का कोई अधिकार है। यह किसी का भी विषय नहीं है।" अदालत ने ऐसी सोच को रूढ़िवादी और अस्वीकार उस मानसिकता करार दिया, जिसमें यह माना जाता है कि महिला के कपड़े युवाओं को बिगाड़ सकते हैं।
गरिमा और व्यक्तिगत सीमाओं पर अदालत का संदेश
Justice Sudha ने आगे स्पष्ट किया कि महिला द्वारा पहने जाने वाले कपड़े न तो उसकी गरिमा को कम करते हैं और न ही उसके खिलाफ किए गए किसी भी गैरकानूनी कृत्य को सही ठहराते हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि इस तरह की समस्याओं का समाधान महिलाओं के कपड़ों को नियंत्रित करने में नहीं है, बल्कि माता-पिता और समाज को बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि वे अपने आचरण को नियंत्रित करें, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करें और हर इंसान के साथ सम्मान से पेश आएं।
अदालतों के लिए नए निर्देश और संवेदनशीलता
High Court ने यह भी निर्देश दिया कि महिला के कपड़ों, चरित्र, जीवन शैली, धर्म या व्यक्तिगत पसंद से जुड़े सवाल अदालत में तब तक नहीं पूछे जाने चाहिए जब तक कि वे मामले से पूरी तरह संबंधित न हों। अदालत ने इस फैसले को Principal District and Sessions Judges और Delhi Judicial Academy को भेजने का आदेश दिया है ताकि संवेदनशीलता कार्यक्रम (sensitisation programs) चलाए जा सकें।