दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 13 साल के अवैध कब्जे पर किरायेदार को देने होंगे 3.27 करोड़ रुपये

दिल्ली हाईकोर्ट ने डिफेंस कॉलोनी मार्केट की एक संपत्ति पर 13 साल तक बिना अनुमति कब्जा रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने किरायेदार को 3.27 करोड़ रुपये 'मीन्स प्रॉफिट' (अवैध कब्जे के मुआवजे) के रूप में देने का आदेश दिया है, साथ ही इस पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा। यह विवाद 1 जनवरी 2002 को शुरू हुए एक लीज समझौते से जुड़ा था, जो 31 दिसंबर 2004 को समाप्त होने वाला था।
विवाद और लीज की पृष्ठभूमि
समझौते के नियमों के तहत नवीनीकरण पर 20 प्रतिशत किराया बढ़ाने का प्रावधान था। शुरुआती अवधि के बाद किरायेदार महीने-दर-महीने के आधार पर संपत्ति में रहा। अदालत ने पाया कि मई 2012 में मकान मालकिन मिसेज गर्ग द्वारा किरायेदार को दिए गए 25 लाख रुपये के कर्ज के भुगतान के बाद tenancy प्रभावी रूप से समाप्त हो गई थी। अदालत ने फैसला दिया कि इस भुगतान के बाद किरायेदार का संपत्ति पर कब्जा रखना पूरी तरह से अनधिकृत था।
अदालत का फैसला और कानूनी कार्रवाई
मकान मालकिन की ओर से वकील जी.एस. राघव पेश हुए। किरायेदार द्वारा 31 दिसंबर 2017 को संपत्ति खाली करने के बाद मकान मालकिन ने यह फैसला हासिल किया। 9 जुलाई 2026 के शुरुआती अदालत के फैसले के बाद मकान मालकिन ने एक समीक्षा याचिका दायर की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई गलती न पाते हुए 10 सितंबर 2026 को इस समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया। किंग एंड पार्टनर्स की पार्टनर आशा किरण शर्मा ने कहा कि यह फैसला unauthorized occupants के खिलाफ संपत्ति मालिकों के अधिकारों को मजबूत करता है। यह मामला उस मुआवजे की गणना के लिए एक कानूनी मिसाल है जो संपत्ति मालिकों को continued unauthorized occupancy के कारण मिलने वाले संभावित बाजार किराये से वंचित होने पर दी जाती है।