सोनू सोनकर रिमिशन मामला: आदेश न मानने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने होम सचिव को तलब किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक गंभीर रुख अपनाते हुए दिल्ली सरकार के गृह विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। यह सख्त कदम कोर्ट के आदेशों का पालन न करने के बाद उठाया गया है। मामला एक आजीवन कारावास के दोषी, सोनू सोनकर की रिमिशन (सजा माफी) से जुड़ा है, जिसमें अधिकारियों द्वारा न्यायिक आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सोनू सोनकर ने अदालत में एक अवमानना याचिका दायर की। सोनकर का आरोप है कि अधिकारियों ने पिछले न्यायिक आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 14 अक्टूबर 2026 को यह निर्देश जारी किया, क्योंकि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब या अनुपालन हलफनामा पेश नहीं किया गया था।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी का आरोप
दरअसल, 20 मई 2025 को हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह सोनू सोनकर की रिमिशन रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करे। सोनकर की रिमिशन तब रद्द की गई थी जब उन्हें एक हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि अधिकारियों को सोनकर को अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए और चार सप्ताह के भीतर एक तर्कसंगत आदेश जारी करना चाहिए।
सोनू सोनकर की ओर से वकील अर्पित बत्रा, शाश्वत मिश्रा और अभिलाषा छलिया ने दलील दी कि प्रशासन ने रिमिशन रद्द करते समय उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। हालांकि प्रशासन ने दिल्ली जेल नियम 2018 का हवाला दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने 'माफ़ाभाई मोतीभाई सागर' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। कोर्ट ने जोर दिया कि किसी भी रिमिशन को रद्द करने से पहले 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें कारण बताओ नोटिस देना और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान करना शामिल है।