रेस कोर्स मस्जिद को ढहाने पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक, 29 अक्टूबर तक राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद को ढहाने पर रोक लगाई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को ढहाए जाने की आशंका के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासन के बाद मस्जिद को गिराने की कार्रवाई पर 29 अक्टूबर तक रोक लगा दी है। यह पूरा मामला एक याचिका के जरिए सामने आया, जिसमें मस्जिद के संरक्षण और वहां जरूरी सुविधाओं की बहाली की मांग की गई थी।
यह याचिका सैयद अहमद सऊद ने दायर की थी, जो इस मस्जिद में नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं। याचिकाकर्ता के वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने कोर्ट को बताया कि मस्जिद को जल्द ही ढहाया जा सकता है, जिससे वहां आने वाले जायरीन और नमाजियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दलील दी कि यह मस्जिद लगभग 100 से 125 साल पुरानी है। साल 1977 के सरकारी गजट में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया था और 1 अक्टूबर 2009 को इसे ग्रेड-II हेरिटेज का दर्जा भी दिया गया था। नियमों के मुताबिक, हेरिटेज संरक्षण समिति की अनुमति के बिना यहां कोई भी तोड़फोड़ या बदलाव नहीं किया जा सकता।
बिजली-पानी काटने पर केंद्र की सफाई
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि 7 अक्टूबर 2026 को मस्जिद की बिजली और पानी की लाइनें काट दी गई थीं। केंद्र सरकार की ओर से वकील आशीष दीक्षित ने स्पष्ट किया कि आसपास के इलाके में चल रहे तोड़फोड़ के काम के कारण सुरक्षा कारणों से ये कनेक्शन काटे गए थे। हालांकि, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) का दावा है कि यह मस्जिद सरकारी जमीन पर एक अनधिकृत निर्माण है।
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर उनका औपचारिक जवाब मांगा है। इससे पहले 19 अक्टूबर को दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ तनवीर अहमद ने भी मस्जिद की सुरक्षा और सुविधाओं को बहाल करने का अनुरोध किया था। वहीं, मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद हारून ने आरोप लगाया था कि उन्हें मौखिक रूप से खाली करने का नोटिस दिया गया था। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 29 अक्टूबर को होगी।