रेस कोर्स मस्जिद तोड़फोड़ पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक, 4 हफ्ते तक नहीं चलेगा बुलडोजर
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद के विध्वंस पर चार हफ्ते की रोक लगाई है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थम गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मस्जिद की तोड़फोड़ पर चार हफ्ते की रोक लगा दी है। यह फैसला गुरुवार को तब आया जब लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने अदालत को सूचित किया कि वे दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा दी गई दलील और प्रतिनिधित्व की समीक्षा कर रहे हैं।
जस्टिस अनीश दयाल की अदालत में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि अगले चार हफ्तों तक मस्जिद के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह याचिका सैयद अहमद सऊद द्वारा दायर की गई थी, जिसमें मस्जिद की सुरक्षा और वहां नमाज पढ़ने की अनुमति बहाल करने की मांग की गई थी। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जब तक सरकार वक्फ बोर्ड की फाइलिंग पर निर्णय नहीं ले लेती, तब तक इस स्थल को छुआ नहीं जाएगा।
विरासत और सुरक्षा का पेच
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यह मस्जिद 'ग्रेड II' संरक्षित संरचना (Protected Structure) की सूची में शामिल है और 1977 के दिल्ली गजट में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में मान्यता दी गई है। नियमों के मुताबिक, ग्रेड II हेरिटेज स्टेटस होने के कारण इस इमारत में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की मंजूरी लेना अनिवार्य है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी गौर किया कि आसपास के इलाकों में तोड़फोड़ का काम जारी है, जिसकी वजह से अगले चार हफ्तों तक नमाजियों के लिए मस्जिद तक पहुंचना मुश्किल रहेगा। इससे पहले 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई थी और 19 अक्टूबर को इसे खाली करने का नोटिस दिया गया था। प्रशासन का तर्क है कि यह पूरा इलाका एक ऑपरेशनल एयरफोर्स स्टेशन के पास प्रोटेक्टेड जोन में आता है, इसलिए भाई राम कैंप और मस्जिद कैंप जैसे आसपास के अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है।
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को होगी, तब तक मस्जिद को विध्वंस से राहत मिल गई है।