दिल्ली हाई कोर्ट ने 54 साल पुराने अक्षरा थिएटर को खाली कराने पर लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने 54 साल पुराने अक्षरा थिएटर को खाली कराने की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार के इस कदम के समय और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह सांस्कृतिक संस्थान साल 1972 में नाटककार गोपाल शर्मा और अभिनेत्री जलाबाला वैद्य द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में इसका संचालन उनकी बेटी अनुसूया वैद्य कर रही हैं।
यह पूरा कानूनी विवाद भूमि और विकास कार्यालय यानी L&DO से जुड़ा है जो आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है। L&DO ने मार्च 2026 में नोटिस जारी करने के बाद इसे खाली कराने की कार्रवाई शुरू की थी। इस मामले में पहले का स्थगन आदेश 20 जुलाई 2026 तक वैध था। न्यायिक चुनौतियों के बावजूद एस्टेट अधिकारी ने अंतिम बेदखली आदेश जारी कर दिया था जिस पर हाई कोर्ट ने अपनी असहमति व्यक्त की है।
सरकार का तर्क है कि इस जमीन की आवश्यकता पास के राम मनोहर लोहिया यानी RML अस्पताल के विस्तार के लिए है। वहीं दूसरी ओर, अक्षरा थिएटर के वकीलों का तर्क है कि सार्वजनिक उद्देश्य का सरकारी दावा इस बेदखली को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। थिएटर का यह भी कहना है कि L&DO साल 1984 में हस्ताक्षरित मूल पट्टा विलेख के पुन: प्रवेश खंड का एकतरफा उपयोग नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के नुस्ली नेविले वाडिया मामले के फैसले का हवाला देते हुए थिएटर का कहना है कि सरकार को सार्वजनिक आवश्यकता के स्पष्ट और पुख्ता सबूत देने होंगे।
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अदालत के हस्तक्षेप के बाद बेदखली की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। इससे थिएटर को बड़ी राहत मिली है जबकि अदालत इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या L&DO की कार्रवाई प्रक्रियागत रूप से त्रुटिपूर्ण थी और उसमें आवश्यक कानूनी औचित्य का अभाव था।