दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: दो महीने में तय करें Sainik Farms की कानूनी स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को दो महीने के भीतर Sainik Farms की कानूनी स्थिति पर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को यह आदेश जारी किया है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि निवासियों को हमेशा अनिश्चितता की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता है। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- कोर्ट ने अधिकारियों को एक संयुक्त बैठक करने और एक स्पष्ट नीति या योजना बनाने का निर्देश दिया है।
- अधिकारियों को नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई से पहले एक व्यापक प्रगति रिपोर्ट (progress report) जमा करनी होगी।
- यह निर्देश 13 अगस्त 2025 के पिछले कोर्ट ऑर्डर के बाद आया है, जिसमें अधिकारियों से इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को हल करने का आग्रह किया गया था।
कोर्ट की कार्यवाही और सरकारी पक्ष
सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने तर्क दिया कि छोटे मरम्मत कार्यों की अनुमति देने के पिछले प्रयासों के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि कॉलोनी के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण (holistic approach) तभी अंतिम रूप ले सकता है जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा तैयार किया जा रहा Master Plan for Delhi (MPD) 2047 केंद्र सरकार से औपचारिक अधिसूचना (notification) प्राप्त कर ले। कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि निवासियों को उनकी स्थिति पता चले और उन्हें अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता।
निवासियों के तर्क और कोर्ट के सुझाव
Sainik Farms के निवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कानूनी वकीलों ने नोट किया कि राजधानी की कई अन्य अनधिकृत कॉलोनियों को विधायी उपायों के माध्यम से नियमित (regularized) कर दिया गया है, लेकिन Sainik Farms इन प्रावधानों से बाहर रहा है। कोर्ट ने स्वीकार किया कि हालांकि मौजूदा निर्माणों में स्वीकृत लेआउट या बिल्डिंग प्लान नहीं हैं, लेकिन सरकार के पास नियमितीकरण के लिए योजनाएं विकसित करने का अधिकार है। इसमें विकास शुल्क लागू करना या यह तय करने के लिए सर्वे करना शामिल है कि किन संरचनाओं को रखना है या गिराना है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ किया जाना चाहिए और निवासियों को अधर में नहीं लटकाया जा सकता।