Delhi High Court का बड़ा फैसला: किराएदार नहीं तय कर सकते मकान मालिक कैसे करें अपनी प्रॉपर्टी का इस्तेमाल

Kittu Kumari15 August 20261 min read246 viewsDelhi Local
Delhi High Court का बड़ा फैसला: किराएदार नहीं तय कर सकते मकान मालिक कैसे करें अपनी प्रॉपर्टी का इस्तेमाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किराएदार को यह तय करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है कि मकान मालिक अपनी प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कैसे करे या अपने बिजनेस ऑपरेशन को कैसे चलाए। जस्टिस हरीश वसंतकुमार शंकर ने कहा कि मकान मालिक अपनी जरूरतों को सबसे अच्छी तरह समझता है और उसे किसी किराएदार द्वारा यह निर्देश नहीं दिया जा सकता कि वह किसी खास फ्लोर, बेसमेंट या अन्य जगह से बिजनेस चलाए। इस फैसले में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रॉपर्टी के मालिक को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि कौन सी जगह उसकी प्रोफेशनल जरूरतों के लिए सबसे सुविधाजनक और उपयुक्त है।

यह पूरा मामला दरियागंज (Daryaganj) में एक कमर्शियल प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद का है, जहां मकान मालिक 'राजीव गुप्ता एचयूएफ' (Rajiv Gupta HUF) ने अपने प्रिंटिंग और पब्लिशिंग बिजनेस को बढ़ाने के लिए बेदखली की मांग की थी। किराएदार 'किशोर लाल एंड संस' (Kishore Lal & Sons) ने यह दलील दी थी कि मकान मालिक के पास अन्य प्रॉपर्टी भी मौजूद हैं जहां इस विस्तार को पूरा किया जा सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दावों को खारिज कर दिया और यह नोट किया कि दरियागंज पब्लिशिंग इंडस्ट्री का एक सेंट्रल हब है और यह मकान मालिक के क्लाइंट बेस के लिए बेहद जरूरी है।

दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट, 1958 की धारा 25बी(8) (Section 25B(8) of the Delhi Rent Control Act, 1958) के तहत अदालत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि इसकी रिविजनल ज्यूरिडिक्शन (revisional jurisdiction) प्रकृति में सुपरवाइजरी (supervisory) है और यह रेंट कंट्रोलर (Rent Controller) के निष्कर्षों की जगह अपनी खुद की कोई राय नहीं दे सकती है।

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