रिलायंस को राहत: Campa Gold Boost के 'एनर्जी ड्रिंक' लेबल पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) को एक बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें रिलायंस के 'Campa Gold Boost' उत्पादों से "एनर्जी ड्रिंक" (Energy Drink) टैग हटाने का आदेश दिया गया था। यह फैसला 6 अक्टूबर, 2026 को आया, जिससे कंपनी ने फिलहाल के लिए राहत की सांस ली है।
पूरा मामला रिलायंस द्वारा 1 अक्टूबर, 2026 को दायर एक रिट याचिका से जुड़ा है। दरअसल, FSSAI ने 30 जून, 2026 को हाई-कैफीन पेय पदार्थों को लेकर एक आदेश जारी किया था, जिसके बाद 17 जुलाई को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को इसे लागू करने के निर्देश दिए गए थे।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि FSSAI ने आदेश लागू करने से पहले रिलायंस को कोई कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) जारी नहीं किया था। जस्टिस ने टिप्पणी की कि यह प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेगुलेटर के लिए अपनी इस प्रक्रियात्मक गलती को सुधारने में "कभी देर नहीं होती"।
दूसरी ओर, FSSAI का तर्क है कि भारतीय नियमों के तहत "एनर्जी ड्रिंक" नाम की कोई अधिकृत खाद्य श्रेणी नहीं है। रेगुलेटर के मुताबिक, इन उत्पादों को 'कैफीनयुक्त पेय' (Caffeinated Beverages) के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जिनमें कैफीन की मात्रा प्रति लीटर 145 मिलीग्राम से 300 मिलीग्राम के बीच होनी चाहिए।
रिलायंस ने अदालत को बताया कि इस निर्देश की वजह से उनके कामकाज में भारी बाधा आई है। कंपनी के मुताबिक, राज्य अधिकारियों ने स्टॉक जब्त किया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से उनके उत्पादों को हटा दिया गया। कंपनी ने अपनी इन्वेंट्री का ब्योरा देते हुए बताया कि उनके पास 16.8 करोड़ कैन और 12 करोड़ प्लास्टिक बोतलें मौजूद हैं, साथ ही करोड़ों अन्य पैकेजिंग पहले से प्रिंट हो चुकी हैं जिन पर विवादित लेबल लगा है।
गौरतलब है कि रिलायंस के अलावा पेप्सिको और मॉन्स्टर बेवरेज ने भी FSSAI के खिलाफ इसी तरह की कानूनी चुनौतियां पेश की हैं, जिन पर सुनवाई होनी बाकी है। इससे पहले रेड बुल और हेल एनर्जी जैसी कंपनियों को भी इसी आधार पर न्यायिक राहत मिल चुकी है कि उन्हें पहले नोटिस नहीं दिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।