IIT एडमिशन के लिए नियमों में ढील से इनकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

Kittu Kumari4 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
IIT एडमिशन के लिए नियमों में ढील से इनकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

दिल्ली हाई कोर्ट ने आईआईटी (IIT) में एडमिशन के लिए पात्रता मानदंडों (Eligibility Criteria) को लेकर दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों के सख्त नियमों और योग्यता मानकों को केवल सहानुभूति या व्यक्तिगत कठिनाइयों के आधार पर नहीं बदला जा सकता। जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने 1 अक्टूबर, 2026 को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट शिक्षा अधिकारियों को स्थापित नियामक मानकों से अलग हटकर काम करने का निर्देश नहीं दे सकता।

यह मामला जेईई (JEE) अभ्यर्थी आशी अग्रवाल द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने आईआईटी दिल्ली में प्रवेश की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि जेईई मेन 2025 के परिणामों के मूल्यांकन में अनियमितताएं थीं और इसी वजह से उन्हें जेईई (एडवांस्ड) 2026 से बाहर कर दिया गया। आशी का दावा था कि अगर उनके अंकों का सही तरीके से आकलन किया जाता, तो वह जेईई (एडवांस्ड) परीक्षा के लिए क्वालीफाई कर लेतीं। इसके अलावा, उन्होंने जेईई मेन 2025 के दूसरे सत्र में अपनी एंट्री रोके जाने को भी चुनौती दी थी, जबकि उनका दावा था कि वह परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंची थीं।

पात्रता नियमों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता का फाइनल परसेंटाइल 85.9241340 था, जो जेईई (एडवांस्ड) परीक्षा के लिए निर्धारित अनिवार्य कट-ऑफ से कम था। जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि एक रिट याचिका के दायरे में कोर्ट ऐसे तकनीकी और तथ्यात्मक दावों की जांच नहीं कर सकता, जब तक कि कोई स्पष्ट गलती या मनमाना रवैया साबित न हो जाए। कोर्ट ने 25 अंक जानबूझकर काटे जाने के दावे को भी निराधार बताया।

साथ ही, याचिकाकर्ता द्वारा एक अतिरिक्त (supernumerary) सीट बनाने की मांग को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने जेईई (एडवांस्ड) 2026 ब्रोशर के मानदंड A4 का हवाला दिया, जिसके अनुसार केवल वही उम्मीदवार पात्र हैं जिन्होंने पहली बार 2025 या 2026 में कक्षा 12वीं की परीक्षा दी हो। चूंकि याचिकाकर्ता ने 2024 में ही 12वीं की परीक्षा दे दी थी, इसलिए वह इस मानदंड में फिट नहीं बैठतीं। कोर्ट ने साफ किया कि ये नियम सभी के लिए समान हैं और इसमें किसी भी तरह का अपवाद नहीं दिया जा सकता। इस मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और आईआईटी रुड़की के आयोजन अध्यक्ष प्रतिवादी थे।

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