दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जींस पहनने वाली लड़कियों पर गलत टिप्पणी अस्वीकार, यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी दोषी करार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को लड़कियों के जींस पहनने से लड़कों के बहकने की सोच को बेहद चिंताजनक और अस्वीकार किया है। जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने इस बात पर जोर दिया कि लड़की का जींस पहनना उसकी पर्सनल चॉइस है और यह सुझाव देना कि ऐसे कपड़े पहनने से युवा लड़के बिगड़ सकते हैं, एक परेशान करने वाला नजरिया है। अदालत ने 2013 के एक यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए निचली अदालत के 2014 के बरी करने के फैसले को पलट दिया। इस मामले में आरोपी का नाम साजिद अली था और पीड़िता एक छोटी लड़की थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कपड़ों को रेगुलेट करना समाधान नहीं
अदालत ने साफ किया कि इसका समाधान लड़कियों और महिलाओं के कपड़ों को रेगुलेट करना नहीं है। इसके बजाय, माता-पिता और समाज को बच्चों को उनके खुद के आचरण को कंट्रोल करने, पर्सनल बाउंड्री का सम्मान करने और हर इंसान के साथ गरिमा के साथ पेश आने की शिक्षा देनी चाहिए। जस्टिस सुधा ने कहा कि महिला के कपड़े न तो उसकी गरिमा को कम करते हैं और न ही उसके खिलाफ किसी गैरकानूनी आचरण को सही ठहराते हैं। अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि महिला के कपड़ों, चरित्र, लाइफस्टाइल, धर्म या पर्सनल चॉइस से जुड़े सवाल क्रॉस-एग्जामिनेशन में तब तक नहीं पूछे जाने चाहिए जब तक वे मामले से सीधे जुड़े न हों, और यह भी कहा कि 'वुमन ऑफ इजी वर्चु' को भी कानूनन सुरक्षा का अधिकार है।