दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा सवाल: क्या जंतर-मंतर पर रोक लगनी चाहिए? जानिए पूरी खबर

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार से सवाल किया कि यदि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से जनजीवन प्रभावित होता है, तो जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है। जस्टिस अमित Mahajan ने कहा कि शहर को इस तरह के प्रदर्शनों द्वारा अनावश्यक रूप से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए और टिप्पणी की कि इस प्रकार के आयोजन शहर में नहीं होने चाहिए, तथा उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका
यह सीधा सवाल ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा आवेदन कथित तौर पर अस्वीकार किए जाने के बाद तीन घंटे के स्थिर प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी। जज ने इस विशिष्ट याचिका को यह कहते हुए निपटा दिया कि दिल्ली पुलिस आवेदन पर निर्णय लेगी। यह अगस्त की शुरुआत (3 और 4 अगस्त 2026) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई इसी तरह की टिप्पणियों के बाद आया है, जिसमें केंद्र को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें निवासियों को होने वाली असुविधा का हवाला दिया गया था और राष्ट्रीय राजधानी के लिए रामलीला मैदान को एक संभावित प्राथमिक विकल्प के रूप में सुझाया गया था।
जंतर-मंतर की वर्तमान स्थिति और नियम
चल रही चर्चाओं के बावजूद, जंतर-मंतर दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए एकमात्र नामित स्थान बना हुआ है, जिसके लिए दिल्ली पुलिस से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है। नियमों के तहत आम तौर पर 1,000 प्रतिभागियों की सख्त सीमा लागू की जाती है, और बड़े प्रदर्शनों को रामलीला मैदान की ओर भेजा जाता है। प्रदर्शन भीड़ के आकार, अवधि और लाउडस्पीकर के उपयोग से संबंधित शर्तों के अधीन हैं, जिनके लिए अलग से अनुमोदन की आवश्यकता होती है। दिल्ली पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया और सोशल मीडिया की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि जंतर-मंतर बंद नहीं किया गया है और शर्तों के पूरा होने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक "सक्रिय और अधिकृत स्थल" बना हुआ है।
सार्वजनिक व्यवस्था और पिछले प्रदर्शन
अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता के साथ विरोध करने के संवैधानिक अधिकार को लगातार संतुलित करते हैं, और अदालतों ने यह फैसला सुनाया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है। इस क्षेत्र में जून और जुलाई 2026 के दौरान महत्वपूर्ण अशांति का अनुभव हुआ, जब जंतर-मंतर राष्ट्रीय परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर "कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)" द्वारा किए गए व्यापक प्रदर्शनों का स्थल था, जिसके कारण मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में भारी भीड़ जमा हुई और अस्थायी इंटरनेट बंद रहे, जो लगभग 25 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ।