दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा के खिलाफ मानहानि का मामला किया रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट ने वरिष्ठ वकील और पूर्व बीजू जनता दल के सांसद पिनाकी मिश्रा के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। यह फैसला 25 अगस्त 2026 को सुनाया गया।
अदालत का फैसला और मुख्य बिंदु
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अप्रैल 2019 में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बुनियादी सामग्री की कमी थी। यह कानूनी विवाद अगस्त 2018 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में वकील सिद्धार्थ सिंह द्वारा पेशेवर कदाचार का आरोप लगाते हुए की गई शिकायत से शुरू हुआ था। इसके बाद जनवरी 2019 में Daily Hunt News को दिए गए एक इंटरव्यू के बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 के तहत मानहानि की कार्यवाही शुरू की गई थी।
बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान पिनाकी मिश्रा के वकीलों ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने के लिए स्वतंत्र गवाह पेश करने में विफल रहा कि टिप्पणियों से उसकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, बचाव पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि बयानों की सामग्री की पुष्टि के लिए समाचार आउटलेट के किसी भी कर्मचारी से पूछताछ नहीं की गई थी।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि आईपीसी की धारा 499 के स्पष्टीकरण 4 को पूरा करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, जिसके लिए यह साबित करने की आवश्यकता होती है कि कोई आरोप दूसरों की नजर में किसी व्यक्ति के चरित्र या साख को गिराता है। अदालत ने नोट किया कि पर्याप्त सामग्री के बिना मुकदमे को जारी रखने से न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं होगी ANINews।