दिल्ली हाई कोर्ट का प्रस्ताव: अब छात्र करेंगे पब्लिक टॉयलेट्स का सरप्राइज निरीक्षण

राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली और गंदगी को दूर करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अनोखा और सख्त कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि अब सोशल वर्क संस्थानों के छात्र और छात्राएं मिलकर पब्लिक टॉयलेट्स का सरप्राइज निरीक्षण करेंगे। इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएं और आम जनता को साफ-सुथरी सुविधाएं मिल सकें।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों तक पहुंच केवल सुविधा नहीं, बल्कि 'जीवन के अधिकार' का एक अनिवार्य हिस्सा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर लोग गंदगी और बदबूदार शौचालयों के बीच रहने को मजबूर हैं, तो यह उनके सम्मान के साथ जीने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। इसी जवाबदेही को तय करने के लिए तीन सामाजिक कार्य संस्थानों से छात्र टीमों की तैनाती की बात कही गई है।
सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और कोर्ट की सख्ती
दिल्ली हाई कोर्ट लंबे समय से नागरिक निकायों की लापरवाही और उदासीनता की आलोचना करता रहा है। इससे पहले भी अदालत ने कई निर्देश दिए हैं, जिसमें सितंबर 2026 के एक फैसले में MCD को मौजूदा साइटों पर स्वच्छता और सीवेज सुविधाओं को दुरुस्त करने का आदेश दिया गया था। वहीं, मार्च 2026 में आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय बनाने और तब तक मोबाइल टॉयलेट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी घोषणा की है कि मुख्यमंत्री विकास कोष का उपयोग करके 2,000 नए सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। इसमें से 1,000 शौचालय MCD और 1,000 पर्यटन विभाग द्वारा अगले एक साल में तैयार किए जाएंगे। इससे पहले जून 2026 में MCD कमिश्नर ने भी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को फंड की मांग जल्द पूरी करने के निर्देश दिए थे ताकि विकास कार्यों में कोई देरी न हो।