पुलिस विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- पहले दाखिल करें औपचारिक याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस कर्मियों के विरोध प्रदर्शन पर स्वत: संज्ञान लेने से इनकार किया और वकीलों को औपचारिक याचिका दायर करने को कहा।

दिल्ली पुलिस कर्मियों के हालिया विरोध प्रदर्शन और वकीलों के साथ हुए टकराव के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने इस पूरे मामले पर स्वत: संज्ञान (suo motu cognizance) लेने से इनकार कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर सुनवाई तभी होगी जब वकील एक औपचारिक याचिका दायर करेंगे। कोर्ट ने यह निर्देश 3 नवंबर, 2026 को दिए।
दरअसल, यह पूरा विवाद 2 नवंबर, 2026 को तब गरमाया जब लगभग 100 से 150 दिल्ली पुलिस कर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने लगे। इस विरोध की जड़ें 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक झड़प में छिपी हैं, जिसमें एक वकील के सिर में गंभीर चोट आई थी। इस घटना के बाद जिला अदालत के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी, जो 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के बाद ही खत्म हुई।
पुलिस कर्मियों की मांगें और निलंबन का मामला
2 नवंबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार को पांच मुख्य मांगें सौंपी थीं। इन मांगों में शामिल था:
- वकीलों और पुलिस के बीच टकराव को रोकने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जाए।
- पुलिस स्टेशन के भीतर एक समय में अधिकतम पांच वकीलों के प्रवेश की सीमा तय हो।
- दुर्व्यवहार करने वाले वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
- तबादला किए गए दोनों अधिकारियों को वापस बुलाया जाए।
- प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच अनुशासन के उल्लंघन के चलते एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। अब कोर्ट ने इस मामले की औपचारिक याचिका पर कल सुनवाई करने का समय तय किया है।