वकीलों को धमकाने का मामला: ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ हाई कोर्ट में PIL पर सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट शुक्रवार को सस्पेंडेड ACP मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ दायर PIL पर सुनवाई करेगा।

दिल्ली हाई कोर्ट इस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को एक बेहद संवेदनशील मामले पर सुनवाई करने जा रहा है। यह पूरा विवाद दिल्ली पुलिस के अधिकारियों द्वारा वकीलों को दी गई धमकियों और अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका (PIL) में निलंबित सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुए टकराव से हुई थी, जिसने कानूनी समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। मामला तब और बिगड़ गया जब 2 नवंबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों ने तबादलों के विरोध में प्रदर्शन किया। आरोप है कि इस दौरान अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से AK-47 का जिक्र करते हुए धमकियां दीं और वकीलों के लिए 'काले कोट के गुंडे' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद गृह मंत्रालय ने सख्त कदम उठाते हुए ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया था। हालांकि, वकील समुदाय इस मामले में केवल निलंबन से संतुष्ट नहीं है। अधिवक्ता करण बीर सिंह ने वकील विक्रांत डबास के माध्यम से यह PIL दाखिल की है, जिसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।
गौरतलब है कि मंगलवार, 3 नवंबर को वकीलों के एक समूह ने एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच से इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेने का अनुरोध किया था। लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए अनुरोध ठुकरा दिया कि एक 'कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड' होने के नाते उसे आगे बढ़ने के लिए औपचारिक याचिका की आवश्यकता है। इसी के बाद वकीलों ने तुरंत PIL दाखिल की, जिसे अब शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।