दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम: कृषि भवन स्थित पुरानी मस्जिद के भविष्य पर सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने कृषि भवन परिसर में बनी प्राचीन मस्जिद के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने अधिकारियों को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 2 नवंबर 2026 को होगी। अदालत में यह सुनवाई जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने 24 सितंबर 2026 को की। याचिका मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति की तरफ से दायर की गई है, जिसकी पैरवी वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने की।
मस्जिद समिति की मांग और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में कोई बाधा नहीं डालना चाहते हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन की जगहों पर कॉमन सेंट्रल सचिवालय की इमारतें बनाई जानी हैं। उनकी मुख्य चिंता यह है कि विस्तृत नक्शों में मस्जिद का जिक्र नहीं है। हालांकि सीपीडब्ल्यूडी के टेंडर दस्तावेजों में इसे हटाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि अगर इस ढांचे को मौजूदा जगह पर नहीं रखा जा सकता, तो सरकार को आसपास ही कोई वैकल्पिक जगह देनी चाहिए।
ऐतिहासिक महत्व और वक्फ संपत्ति
यह कदीमी मस्जिद एक मान्यता प्राप्त वक्फ संपत्ति है जिसे दिल्ली प्रशासन के 1970 के गजट में दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया गया था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि यह जगह एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। इसका अस्तित्व कम से कम 1945 से दर्ज है। हालांकि यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई का संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन दशकों से यह क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों की सेवा कर रहा है।
किन अधिकारियों को भेजा गया नोटिस
संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए याचिका दाखिल की गई है। इस मामले में कई प्रमुख विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिन प्राधिकरणों को नोटिस मिले उनमें भारत संघ, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले विभाग, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और दिल्ली वक्फ बोर्ड शामिल हैं।