करोल बाग में पेड़ों की कटाई पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, DMRC और DDA को नोटिस

करोल बाग इलाके में अंडरग्राउंड मेट्रो के निर्माण के दौरान पर्यावरण को पहुँचाए जा रहे नुकसान पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और उनसे जवाब तलब किया है।
4 अक्टूबर, 2026 को जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से कहा, "यह क्या हो रहा है? आप आँखें बंद करके नहीं बैठ सकते। केवल वही हटाएँ जो वास्तव में आवश्यक हो।" कोर्ट ने इस मामले में DMRC, DDA और दिल्ली सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
मेट्रो निर्माण से पर्यावरण को खतरा
यह पूरा मामला वकील अर्पित भार्गव द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि देशबंधु गुप्ता रोड स्थित उनके निवास के पीछे DDA की खाली जमीन पर DMRC द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से लोहा और स्टील काटने के कारण भारी मात्रा में धूल, धुआं और जहरीले कण निकल रहे हैं।
इन प्रदूषकों की वजह से आसपास के पेड़ों की पत्तियों और मिट्टी पर गंदगी जमा हो रही है, जिससे इलाके की हरियाली को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि बाउंड्री वॉल बनाने और जमीन की खुदाई के कारण पुराने और परिपक्व पीपल के पेड़ों को काफी क्षति पहुँची है।
याचिका में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यह पूरी प्रक्रिया 'दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट' (DPTA) का सीधा उल्लंघन है। वकील अर्पित भार्गव ने कोर्ट को बताया कि संबंधित अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद पर्यावरण के इस नुकसान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसके बाद उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी।