'Bring Back Ballot' अकाउंट बैन मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और मेटा से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने 'Bring Back Ballot' इंस्टाग्राम अकाउंट बैन करने पर केंद्र सरकार और मेटा से जवाब मांगा है।

भारतीय चुनावों में पेपर बैलेट वापस लाने की वकालत करने वाले इंस्टाग्राम अकाउंट 'Bring Back Ballot' के बैन होने का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस अमित महाजन ने 27 अक्टूबर को यह आदेश सुनाया और मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर के लिए तय की है।
यह पूरी कानूनी लड़ाई 'मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन' संगठन और उसके संस्थापक वकील महमूद प्राचा द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू हुई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 'Bring Back Ballot' अकाउंट के 50,000 से ज्यादा फॉलोअर्स थे, लेकिन इसे अचानक बंद कर दिया गया।
विरोध प्रदर्शन के दिन ही हुआ अकाउंट बंद
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि इस अकाउंट को 10 अक्टूबर को डीएक्टिवेट किया गया। संयोग यह है कि इसी दिन संगठन ने जंतर मंतर पर 'EVM हटाओ देश बचाओ' नाम से एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। याचिका में कहा गया है कि इस प्रदर्शन की सूचना दिल्ली पुलिस को 9 सितंबर को ही दे दी गई थी।
जब यूजर्स इस पेज को खोलने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें एक संदेश दिख रहा था कि कानूनी अनुरोध के पालन में यह कंटेंट भारत में उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी है कि अकाउंट को बिना किसी पूर्व नोटिस, कारण या सुनवाई के निलंबित किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के साथ-साथ आईटी एक्ट 2000 का उल्लंघन है।
उनका आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से असंगत थी क्योंकि मेटा ने यह नहीं बताया कि कौन सा कंटेंट आपत्तिजनक था और न ही इस फैसले को चुनौती देने का कोई तरीका दिया गया। सुनवाई के दौरान वकील अमी राणा ने मेटा की ओर से और आशीष दीक्षित ने गृह मंत्रालय व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से नोटिस स्वीकार किया।