दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बालिगों के लिव-इन रिलेशनशिप शादी के समान, परिवार का दखल अवैध

Kittu Kumari20 August 20262 min read161 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बालिगों के लिव-इन रिलेशनशिप शादी के समान, परिवार का दखल अवैध

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि consenting adults (सहमति देने वाले बालिगों) के बीच लिव-इन रिलेशनशिप शादी के बराबर होती है। अदालत के अनुसार, ऐसे रिश्तों में माता-पिता, रिश्तेदारों या दोस्तों द्वारा किसी भी तरह की दखलंदाजी पर पूरी तरह रोक है। यह फैसला 13 अगस्त 2026 को जस्टिस सौरभ बनर्जी द्वारा सुनाया गया है। अदालत ने जोर देकर कहा है कि सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण किसी भी व्यक्ति के अपने पार्टनर को चुनने और उसके साथ रहने के बुनियादी अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है।

पुलिस सुरक्षा का आदेश और अदालत की टिप्पणियां

अदालत ने यह आदेश 30 वर्ष की आयु के एक जोड़े को police protection (पुलिस सुरक्षा) देते हुए दिए हैं, जिन्हें महिला के पिता और भाई से लगातार धमकियां मिल रही थीं। यह याचिका उस जोड़े द्वारा दायर की गई थी जो साथ रह रहे हैं और शादी करना चाहते हैं, लेकिन महिला के परिवार द्वारा लगातार किए जा रहे उत्पीड़न से परेशान थे। जस्टिस बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वे जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

संविधान के अनुच्छेद और कानूनी मान्यता

अपने फैसले में जस्टिस बनर्जी ने यह हवाला दिया कि ऐसे रिश्ते Constitution of India (भारत के संविधान) के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत सुरक्षित हैं, जो स्वतंत्रता और जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देते हैं। अदालत ने यह नोट किया कि यदि जोड़ा कानूनी रूप से विवाहित नहीं भी है, तब भी बालिगों के रूप में उनके रिश्ते की प्रकृति शादी जैसी ही है। यह व्याख्या मौजूदा कानूनी ढांचे जैसे घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अनुकूल है, जो पहले से ही शादी की प्रकृति वाले रिश्तों को मान्यता देता है। यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि व्यक्तिगत स्वायत्तता सर्वोपरि है और इसे बाहरी पारिवारिक दबाव के खिलाफ संरक्षित किया जाना चाहिए।

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