जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शनों पर लगी रोक, दिल्ली हाई कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई

राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित जंतर मंतर, जो दशकों से आम जनता की आवाज का केंद्र रहा है, अब कानूनी लड़ाई के मोड़ पर है। जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट आज सुनवाई करेगा। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक आदेश जारी कर जंतर मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया।
पुलिस प्रशासन ने गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर यह कदम उठाया है। अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, बुरारी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थानों पर जाने को कहा गया है। इस फैसले के खिलाफ भारतीय युवा कांग्रेस सहित कई पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जंतर मंतर को बंद करना शांतिपूर्ण सभा करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
हिंसा के आरोप और सुप्रीम कोर्ट की नजर
मामला सिर्फ प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर भी विचार करेगा जिनमें 10 और 11 अक्टूबर को कनॉट प्लेस और जंतर मंतर के पास सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। गौरतलब है कि 1993 में बोट क्लब पर प्रतिबंध के बाद पिछले 33 वर्षों से जंतर मंतर ही विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा है।
दूसरी ओर, राजनीतिक सरगर्मी भी तेज है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज अपने आवास पर 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों को हाई-टी पर आमंत्रित किया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एकजुट होना है।
विपक्ष पहले ही 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' निकाल चुका है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन भी सौंपा है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के आवास पर होने वाली इस बैठक के बाद विपक्षी दल किसी बड़े संयुक्त प्रदर्शन या प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा कर सकते हैं।