जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का मामला, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार तक टाल दी सुनवाई

जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई है। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया और अब इस पर सोमवार को विचार किया जाएगा। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने याचिकाकर्ता की तत्काल सुनवाई की जरूरत पर सवाल उठाए, जिसके बाद मामले को अगली तारीख दे दी गई।
यह पूरा विवाद दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने के बाद शुरू हुआ। भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिव की ओर से वकील रूपेश सिंह भदौरिया ने यह याचिका दायर की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कोर्ट के सामने मामले की गंभीरता बताते हुए तत्काल सुनवाई की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे सोमवार के लिए पुनर्निर्धारित कर दिया।
क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध?
भारतीय युवा कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े चुनावी रोल के 'स्पेशियल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) अभ्यास में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाना चाहती थी। संगठन की योजना 100 से 150 लोगों के साथ एक शांतिपूर्ण सभा करने की थी, जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 1 अक्टूबर को ही इस आवेदन को खारिज कर दिया था।
अपनी याचिका में युवा कांग्रेस ने दलील दी है कि दिल्ली पुलिस के पास सार्वजनिक सभाओं को विनियमित करने का अधिकार तो है, लेकिन वह पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगा सकती। याचिका में कहा गया है कि अनुमति न देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत मिलने वाले अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।