अवैध अतिक्रमण और पार्किंग पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, कहा- कोर्ट के बाहर भी बंद हैं रास्ते
दिल्ली हाई कोर्ट ने फुटपाथों पर अवैध कब्जे और पार्किंग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जानें कोर्ट ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी।

देश की राजधानी दिल्ली में फुटपाथों और सड़कों पर बढ़ते अवैध कब्जों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर में सार्वजनिक स्थानों की बदहाली पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि जिस शहर में फुटपाथों को खाली कराने की बात हो रही है, वहां खुद हाई कोर्ट के बाहर की सड़कें अवैध पार्किंग की वजह से जाम रहती हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच ने 28 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में स्पष्ट कहा कि स्थिति काफी गंभीर है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट परिसर के बाहर की चार लेन वाली सड़कें अक्सर अवैध पार्किंग के कारण ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचता।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और पुलिस की कार्रवाई
सिर्फ हाई कोर्ट ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि 25 नवंबर 2026 तक सुरक्षित फुटपाथ और पैदल पार पथ (pedestrian crossings) सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
अदालतों के इस कड़े रुख के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस एक्शन मोड में नजर आई। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते और नवंबर की शुरुआत में पुलिस ने सघन अभियान चलाया। इस दौरान कुल 27 टारगेटेड ड्राइव्स की गईं, जिनमें सैकड़ों अवैध रेहड़ियों और पटरी दुकानों को हटाया गया। साथ ही, सड़कों पर गलत तरीके से खड़े वाहनों को क्लैंप किया गया या टो किया गया, ताकि आम जनता के लिए रास्तों को दोबारा सुगम बनाया जा सके।