ग्राउंड बुकिंग के लिए 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति गलत, दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक मैदानों के आवंटन के लिए अपनाई जाने वाली 'पहले आओ पहले पाओ' (First Come, First Served) की नीति को मनमाना और संवैधानिक रूप से अनुचित करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर मैदान आवंटित करना कि कौन पहले आया, सार्वजनिक नीति के अनुकूल नहीं है। यह फैसला 'रेज़ ऑफ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन' द्वारा दायर एक याचिका पर आया है, जिसके रामलीला दशहरा महोत्सव के लिए मैदान की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
जस्टिस अमित महाजन ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां सूचना के लिए एक असमान 'दौड़' पैदा करती हैं। इससे उन लोगों को अनुचित लाभ मिल सकता है जिनकी प्रशासनिक पहुंच अधिक है, जबकि अन्य योग्य आवेदक पीछे छूट जाते हैं। कोर्ट ने माना कि केवल मशीनी तरीके से तय की गई नीति न्यायसंगत नहीं हो सकती।
DDA और MCD को अब बनाने होंगे पारदर्शी नियम
अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वे अब मैदानों के आवंटन के लिए व्यापक वार्षिक दिशा-निर्देश तैयार करें। नए नियमों के तहत अब निम्नलिखित व्यवस्थाएं लागू होंगी:
- किसी भी कार्यक्रम से कम से कम 90 दिन पहले साइट आवंटन का नोटिस जारी करना होगा, जिसमें उपलब्ध मैदानों, पात्रता, शुल्क और मूल्यांकन मानदंडों की पूरी जानकारी होगी।
- सभी आवेदन एक ही निर्धारित समय सीमा (विंडो) के भीतर लिए जाएंगे, ताकि सभी को समान अवसर मिले।
- एक पारदर्शी स्कोरिंग मैट्रिक्स बनाया जाएगा, जिसके आधार पर प्रतिस्पर्धी आवेदकों का मूल्यांकन किया जाएगा।
- भविष्य की नीतियों में शिकायतों के निवारण (grievance redressal) के लिए एक तंत्र भी शामिल करना होगा।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जिन आयोजकों का पिछला रिकॉर्ड अच्छा रहा है, उन्हें सीमित प्राथमिकता दी जा सकती है, लेकिन यह उन्हें आवंटन का स्वचालित अधिकार नहीं देता। साथ ही, यदि अन्य योग्य आवेदक मौजूद हैं, तो किसी एक को लगातार दो साल से अधिक प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
यह आदेश भविष्य के लिए प्रभावी होगा और 2026 के चल रहे उत्सवों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के आदेश के बाद रामलीला मैदान अब जंतर मंतर की तरह विरोध प्रदर्शनों के लिए मुख्य स्थल बन गया है, जिससे इसकी मांग काफी बढ़ गई है। वर्तमान में इस साल के अंत तक केवल दिसंबर के आखिरी तीन दिन ही खाली बचे हैं।